
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई तथा राज्यसभा में पार्टी के उपनेता प्रमोद तिवारी ने शुक्रवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि आज लोक सभा और राज्य सभा में बजट सत्र का दूसरा चरण समाप्त हो गया। सत्र के दौरान हुई गतिविधियों को देखकर ऐसा लगता है कि भाजपा के डीएनए में फासीवाद समा गया है।
श्री तिवारी ने कहा, “आज हम इंजतार कर रहे थे कि लोकसभा में अध्यक्ष और राज्यसभा में सभापति सदन को शुरू करेंगे लेकिन इससे पहले ही भाजपा ने सत्ता पक्ष होते हुए सदन में हंगामा शुरू कर दिया। भाजपा लोकतंत्र का बेसिक प्रिंसिपल तोड़ रही है। प्रधानमंत्री थाइलैंड गए हैं और गृहमंत्री छत्तीसगढ़ जा रहे हैं। राज्यसभा में विपक्ष के नेता ने कहा भी कि मणिपुर में पिछले दो साल से हिंसा हो रही है, जब मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने जा रहे हैं तो इस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। राज्य सभा में मणिपुर पर चर्चा के लिए तीन घंटे निर्धारित थे लेकिन सिर्फ 50 मिनट में ही खत्म कर दिया गया। भाजपा के अंदर तानाशाही का डीएनए समा गया है और भाजपा लगातार लोकतंत्र की हत्या कर रही है।”
कांग्रेस नेताओं ने कहा, “लोकसभा में राज्य सभा के सदस्यों का जिक्र नहीं होता है। कोई इल्जाम नहीं लगाया जाता है, क्योंकि वो खुद के बचाव के लिए वहां उपस्थित नहीं होते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पर आधारहीन आरोप लोकसभा में लगाए गए जिसका हमने विरोध किया तो उसे कार्यवाही से निकालना पड़ा। राज्यसभा में श्री खरगे ने इस बात पर चुनौती दी, तो सभी ने गलत माना। भाजपा लोकतंत्र में यकीन ही नहीं करती। अगर परंपरा नहीं निभा सकते, तो कम से कम नियम तो फॉलो करें।”
उन्होंने कहा, “कल मैंने राज्य सभा में नियम 37 उठाया। सदन चलने की एक तय समय सीमा होती है- सुबह 11 से शाम 6 बजे तक। शाम 6 बजने से कुछ मिनट पहले ये तय किया जाता है कि सदन का समय बढ़ाना है या नहीं। कल सदन शाम 6 बजे के बाद भी जारी रहा। इसलिए मैंने रात 11 बजे नियम 37 उठाया कि ये गलत हो रहा है। ऐसे में शाम 6 बजे के बाद वक्फ और मणिपुर जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई है, जो नियम 37 का उल्लंघन है। इसी तरह से मणिपुर पर चर्चा के लिए तीन घंटे का समय निर्धारित था लेकिन सिर्फ 50 मिनट में इसकी चर्चा पूरी कर दी गई और वहां राष्ट्रपति शासन अप्रूव कर दिया गया। ऐसे में आप सभी अंदाजा लगा लीजिए मणिपुर पर क्या चर्चा हुई होगी।”
गौरव गोगोई ने कहा, “ऐसा लगता है कि सदन धीरे-धीरे भारत की जनता का सदन नहीं, श्री मोदी का दरबार बन गया है। सदन में श्री मोदी के जयकार स्वीकृत हैं लेकिन जब जरूरी विषय पर सरकार की नीतियों की आलोचना होती है, तब सत्ता पक्ष कूटनीतियों से सदन को स्थगित करता है और जवाबदेही से भागता है। विपक्षी दलों ने अपनी चिंता अध्यक्ष महोदय को पक्ष लिखकर जताई, मिलने भी गए, लेकिन कोई परिवर्तन नहीं दिखा। अमेरिका ने 27 प्रतिशत टैरिफ भारत के निर्यात पर लगाया है, उसे लेकर हम एडजर्नमेंट मोशन की मांग कर रहे थे। एक बार भी माइक की अनुमति नहीं मिली, हम अपनी बात रिकॉर्ड पर नहीं ला पाए। आज दोबारा संसदीय कार्य मंत्री ने सारे नियम जानते हुए भी, कांग्रेस की जनरल बॉडी मीटिंग का उल्लेख किया। जो बात सदन के अंदर नहीं हुई है उसे सदन में उठाना सही नहीं है। उस पर संसदीय कार्यमंत्री और अध्यक्ष महोदय की भी टिप्पणी आती है। ये हमारी संसदीय मर्यादा, नियम, प्रक्रिया के लिए सोचने वाली बात है। हमने लोक सभा सदन में सत्ता पक्ष के सदस्य को राज्य सभा के नेता प्रतिपक्ष का नाम लेते हुए गंभीर और बेबुनियाद आरोप लगाते हुए देखा और आज कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी जी का उल्लेख किया गया।”
उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 27 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है, उससे स्टॉक मार्केट हिल गया है। श्री मोदी और श्री अमित शाह ने कहा था- स्टॉक मार्केट में निवेश करो, लेकिन आज लोगों का नुकसान हो चुका है और 56 इंच की छाती वाले श्री मोदी सदन में विदेश मंत्रालय के ‘डिमांड फॉर ग्रांट्स’ को लेकर चर्चा से भागते हैं। आखिर वे किस बात से डरते हैं। प्रधानमंत्री बंगलादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मिले, जिसने कहा था कि चीन को भारत के उत्तर-पूर्वांचल में निवेश करना चाहिए। ऐसे में क्या प्रधानमंत्री मोदी ने थाइलैंड की बैठक में ये बात उठाई। क्या प्रधानमंत्री ने बंगलादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के विषय में पत्र लिखकर, वहां की सरकार को उनकी चिंता जताई थी। क्या उन्होंने बैठक में इस बारे में बात की। राहुल गांधी ने सदन में स्टार्टअप, ड्रोन और बैटरी टेक्नोलॉजी के बारे में बात करते हुए कहा था कि चीन की इंडस्ट्री बहुत आगे जा चुकी है। आज वही बात प्रधानमंत्री मोदी के करीबी मंत्री पीयूष गोयल जी ने भी कही है। ये वो बातें हैं, जिन पर हम सदन में चर्चा करना चाहते हैं। इसके साथ ही यह बेहद अफसोस की बात है कि नेता विपक्ष श्री गांधी को एक महीने के बजट सत्र में सिर्फ कुछ मिनट ही बोलने की अनुमति दी गई।”