संगीत की छोटी पहल से लोकप्रिय हुई ‘गीतांजलि आईआईएससी’ : पीएम मोदी

नयी दिल्ली,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि है इंडियन इंस्टीट्यूट् ऑफ़ साइंस में एक छोटी-सी संगीत पहल हुई जो अब ‘गीतांजलि आईआईएससी’ के नाम से लोकप्रिय है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 129वीं कड़ी में रविवार को कहा “आपने इंडियन इंस्टीट्यूट् ऑफ़ साइंस का नाम तो जरूर सुना होगा। शोध और नवाचार इस संस्थान की पहचान है। कुछ साल पहले वहाँ के कुछ छात्रों ने महसूस किया कि पढ़ाई और शोध के बीच संगीत के लिए भी जगह होनी चाहिए। बस यहीं से एक छोटी-सी संगीत कक्षा शुरू हुई। ना बड़ा मंच, ना कोई बड़ा बजट। धीरे-धीरे ये पहल बढ़ती गई और आज इसे हम ‘गीतांजलि आईआईएससी’ के नाम से जानते हैं। यह अब सिर्फ एक कक्षा नहीं, परिसर का सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत है, लोक परंपराएँ हैं, शास्त्रीय विधाएं हैं, छात्र यहाँ साथ बैठकर रियाज़ करते हैं। प्रोफ़ेसर साथ बैठते हैं, उनके परिवार भी जुड़ते हैं। आज दो-सौ से ज्यादा लोग इससे जुड़े हैं। और खास बात ये कि जो विदेश चले गए, वो भी ऑनलाइन जुड़कर इस समूह की डोर थामे हुए हैं।”

उन्होंने कहा “अपनी जड़ों से जुड़े रहने के ये प्रयास सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के अलग-अलग कोनों और वहाँ बसे भारतीय भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। एक और उदाहरण जो हमें देश से बाहर ले जाता है – ये जगह है ‘दुबई’। वहाँ रहने वाले कन्नड़ परिवारों ने खुद से एक जरूरी सवाल पूछा – हमारे बच्चे टेक -वर्ल्ड में आगे तो बढ़ रहें हैं, लेकिन कहीं वो अपनी भाषा से दूर तो नहीं हो रहे हैं? यहीं से जन्म हुआ ‘कन्नड़ा पाठशाले’ का। एक ऐसा प्रयास, जहां बच्चों को ‘कन्नड़’ पढ़ना, सीखना, लिखना और बोलना सिखाया जाता है। आज इससे एक हजार से ज्यादा बच्चे जुड़े हैं। वाकई, कन्नड़ा नाडु, नुडी नम्मा हेम्मे। कन्नड़ की भूमि और भाषा, हमारा गर्व है।”

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