पीएम मोदी क्यों नहीं दे रहें ट्रंप की बार बार धमकियों और अपमान का जवाब ?

लखनऊ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को धमकी दी है और पीएम मोदी के लिये अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के रूस से तेल ख़रीदने और अमेरिकी टैरिफ़ को लेकर एक बार फिर से बयान दिया है. ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि अगर वो रूस के साथ व्यापार जारी रखता है तो उस पर जल्द ही टैरिफ़ बढ़ाया जा सकता है.

दरअसल, 04 जनवरी को एयर फ़ोर्स वन विमान में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पत्रकारों से रूस-यूक्रेन युद्ध पर बात कर रहे थे. उनके साथ अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम भी मौजूद थे। पत्रकारों से बातचीत के दौरान लिंडसे ग्राहम बता रहे थे कि किस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फ़ैसलों से रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर अब तक का सबसे अधिक दबाव पड़ा है. इसी दौरान ट्रंप ने उन्हें टोकते हुए कहा कि “ये रूस को बुरी तरह नुकसान पहुंचा रहा है और भारत भी ख़ुद को बाहर निकाल रहा है.”

इसके बाद लिंडसे ग्राहम ने कहा, “इन्होंने भारत पर रूस से तेल ख़रीदने पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है. मैं लगभग एक महीने पहले भारतीय राजदूत (विनय क्वात्रा) के घर पर था और वो सिर्फ़ ये बात करना चाहते थे कि कैसे वे अब रूस से बहुत कम तेल ख़रीद रहे हैं और मैं राष्ट्रपति से टैरिफ़ में राहत देने के लिए कहूं.” लेकिन मैंने कहा कि “अगर आप सस्ता रूसी तेल ख़रीदते रहेंगे और पुतिन की वॉर मशीन को चलने देंगे तो हम राष्ट्रपति को ये क्षमता मुहैया कराएंगे कि वो टैरिफ़ के ज़रिए कठिन विकल्प चुनें.

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे पत्रकारों से कहा कि मेरा बिलकुल यह मानना है कि इन्होंने (ट्रंप) भारत के साथ जो किया, इसी की वजह से भारत अब रूस से बहुत हद तक कम रूसी तेल ख़रीद रहा है.”लिंडसे ग्राहम इसी दौरान उस ‘रशियन सेंक्शंस बिल’ के बारे में भी बता रहे थे. इस बिल के तहत रूस से तेल या यूरेनियम ख़रीदने वाले देशों पर 500 फ़ीसदी तक टैरिफ़ लगाने का प्रावधान किया गया है.

इसतरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत को लेकर सख्त रुख दिखाया है। उन्होंने कहा है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर अमेरिका की मदद नहीं करता, तो भारतीय सामानों पर लगाए गए टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं। ट्रंप ने यह भी याद दिलाया कि अगस्त 2025 में इसी मुद्दे को लेकर भारत पर टैरिफ दोगुना कर 50% कर दिया गया था। अपने संबोधन में ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम लिया। उन्होंने पीएम मोदी को अच्छा आदमी बताते हुए कहा कि मोदी जानते थे कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुश नहीं है। व्हाइट हाउस की तरफ से जारी किए गए एक ऑडियो में ट्रंप को यह कहते हुए सुना गया,कि वह (पीएम मोदी) जानते थे कि मैं खुश नहीं था। मुझे खुश करना जरूरी था। वे व्यापार करते हैं और हम बहुत जल्दी उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।” ये बयान ट्रंप ने उस ब्रीफिंग के दौरान दिए, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका के अगले कदमों पर बात की। उस चर्चा में भी तेल एक अहम मुद्दा था।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता चल रही है। ट्रंप और ग्राहम के इस बयान के बाद भारत के विपक्षी दल केंद्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं. विपक्षी दलों ने केंद्र की बीजेपी सरकार की निंदा की है. रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की तरफ से भारत पर की गई टिप्पणी की कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी पर भी सवाल उठाया है। मुख्य विपक्षी पार्टी ने पूछा कि आखिर मोदी और ट्रंप के बीच दिखाई देने वाले मजबूत सार्वजनिक संबंधों के बाद भी अमेरिका का भारत को लेकर रवैया धमकी भरा क्यों हैं?कांग्रेस ने इसे भारत का अपमान बताया है और कहा है कि पीएम मोदी को इसका जवाब देना चाहिए.

कांग्रेस ने एक्स पर लिखा, “ट्रंप ने कहा- ‘नरेंद्र मोदी ने मुझे ख़ुश करने के लिए रूस से तेल ख़रीदना बंद कर दिया’ ये भारत का अपमान है. नरेंद्र मोदी को इसका जवाब देना चाहिए, देश को सच्चाई बतानी चाहिए.”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सोमवार को कहा कि मोदी और ट्रंप के रिश्तों में दिखने वाली गर्मजोशी के बावजूद वाशिंगटन का भारत के प्रति रवैया कभी गर्म कभी ठंडा नजर आता है। अपने सोशल मीडिया हैंडल पर उन्होंने लिखा, “वाइट हाउस में प्रधानमंत्री के अच्छे दोस्त का भारत के प्रति रवैया कभी गर्म कभी ठंडा ही है। एक बार फिर से भारत पर ऊंचे टैरिफ लगाने की धमकी दी गई है। वह सब बड़े कार्यक्रम जैसे नमस्ते ट्रंप, हाउडी मोदी, वह जबरदस्ती का गले मिलना और अमेरिकी राष्ट्रपति की तारीफ में किए गए लंबे पोस्ट, भारत के लिए ज्यादा काम नहीं आए।”

जयराम रमेश के अलावा कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पीएम मोदी को कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा लागत के आधार पर ईंधन खरीदता रहा है और रूस से आने वाला तेल सस्ता है। यह तेल खरीदना हमारा संप्रभु अधिकार है। अमेरिका प्रधानमंत्री मोदी की कमजोरी का फायदा उठा रहा है।

कांग्रेसनेत्री सुप्रिया श्रीनेत ने लिखा, “ट्रंप वहां खड़े होकर भारत का मजाक उड़ा रहे हैं। अपमानित कर रहे हैं। ट्रंप के बगल में खड़ा एक अमेरिकी सीनेटर दावा करता है कि भारतीय राजदूत राष्ट्रपति को खुश करने के लिए गिड़गिड़ा रहा था। ट्रंप कहते हैं कि मोदी ने अमेरिकी दबाव में रूसी तेल के आयात को घटाया है ताकि वह खुश हो सकें।” “ऐसे गुंडे खुलेआम मेरे देश का मजाक उड़ा रहे हैं। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री की ओर से एक शब्द तक नहीं आया। एक आवाज भी नहीं।”

आमआदमीपार्टी ने x पर लिखा,”मोदी जी आपकी चुप्पी देश की इज़्ज़त पर भारी पड़ रही है.आख़िर ऐसा क्या है,जिसके लिए आप ट्रंप को ख़ुश करना चाहते हैं.”

वैसे दिसंबर में होने वाली तेल डिलीवरी के आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी कंपनियों से तेल ख़रीदना काफ़ी कम कर दिया है.ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ भारत की पांच बड़ी रिफाइनरी कंपनियों ने दिसंबर महीने के लिए तेल ख़रीद का कोई ऑर्डर नहीं दिया था. तेल ख़रीद पर रियल टाइम डेटा देने वाली फर्म केपलर के मुताबिक़ भारत ने एक से 17 नवंबर के बीच रूस से हर दिन 6,72,000 बैरल तेल ख़रीदा. ये अक्तूबर महीने में ख़रीदे गए 18 लाख बैरल प्रति दिन से काफ़ी कम है.हालांकि दो रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध के बाद बाक़ी जगहों पर होने वाला रूस का तेल निर्यात 28 फ़ीसदी तक कम हो गया था.

इतना सब करने के बाद भी अमेरिका के भारत को लेकर ये तेवर और ये भाषा निश्चित रूप से भारत का अपमान है। जिसका ट्रंप को वाजिब जवाब दिया जाना जरूरी है।

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