मजबूत वैश्विक सहभागिता से विश्व पुस्तक मेला को मिली नई पहचान

नयी दिल्ली, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में 10 जनवरी से चल रहा नौ दिवसीय नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला रविवार को मजबूत वैश्विक सहभागिता नई पहचान के साथ संपन्न हो गया।

विश्व पुस्तक मेला के 53वें संस्करण के अंतिम दिन भारी उत्साह, रिकॉर्ड जनभागीदारी और जीवंत साहित्यिक माहौल देखने को मिला। मेले के अंतिम दिन देर शाम तक पुस्तक स्टॉलों पर पाठकों और पुस्तक प्रेमियों की भारी भीड़ बनी रही। लोग लंबी कतारों में खड़े होकर किताबें खरीदते दिखे, अपने प्रिय लेखकों को सुनने के लिए मंचों के आसपास जगह बनाते रहे और बच्चे व युवा संवाद, विमर्श और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लेते नजर आए।

इस वर्ष निःशुल्क प्रवेश ने मेले की लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। आयोजकों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में दर्शकों की संख्या में 15–20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। 10 से 18 जनवरी 2026 तक चले इस नौ-दिवसीय आयोजन में अनुमानित 20 लाख से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया। शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी) द्वारा आयोजित इस मेले में 35 से अधिक देशों के 1,000 से ज्यादा प्रकाशकों, 1,000 से अधिक वक्ताओं और 600 से अधिक चयनित कार्यक्रमों की भागीदारी रही।

विभिन्न श्रेणियों के प्रकाशकों ने बताया कि निःशुल्क प्रवेश से न केवल पाठक वर्ग का विस्तार हुआ, बल्कि बिक्री में भी औसतन 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रकाशकों के अनुसार परिवारों, छात्रों और पहली बार मेले में आने वाले पाठकों ने स्टॉलों पर अधिक समय बिताया और पुस्तकों में गहरी रुचि दिखाई। विशेष रूप से बाल साहित्य और सामान्य रुचि की पुस्तकों की मांग अधिक रही।

इस वर्ष एक नई पहल के तहत एनबीटी ने इनोवेटिव स्टॉल डिजाइन प्रस्तुत करने वाले प्रकाशकों को प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए। सम्मानित संस्थानों में अतिथि देश कतर, संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार), नोटियन प्रेस, राजकमल प्रकाशन, हार्पर कॉलिन्स, और वीके ग्लोबल शामिल रहे।

इस बार के विश्व पुस्तक मेला 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण 1000 वर्ग मीटर में फैला थीम पवेलियन “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य एवं प्रज्ञा 75” रहा। यहां भारतीय सैन्य इतिहास पर 500 से अधिक पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया और 100 से अधिक विशेष सत्र आयोजित हुए। अर्जुन टैंक, आईएनएस विक्रांत और एलसीए तेजस की वास्तविक आकार की प्रतिकृतियों ने विशेष रूप से युवाओं को आकर्षित किया।

थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने भी पवेलियन का दौरा किया और युवाओं से पढ़ने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।

इस वर्ष मेले की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता उल्लेखनीय रही। कतर अतिथि देश और स्पेन फोकस देश रहा। इंटरनेशनल इवेंट्स कॉर्नर में 35 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने साहित्य, अनुवाद, बहुभाषिक कविता, बाल साहित्य, रंगमंच और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर संवाद किया। इससे नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला एक वैश्विक साहित्यिक मंच के रूप में और सशक्त हुआ।

इसके अलावा हॉल नंबर 6 में “किड्ज़ एक्सप्रेस” पवेलियन में स्टोरीटेलिंग, कला एवं शिल्प कार्यशालाएं, क्विज़, वैदिक गणित और बाल लेखकों से संवाद जैसे कार्यक्रम आयोजित हुए। सांस्कृतिक संध्याओं में रिकी केज, मंगणियार कलाकारों और सशस्त्र बलों के बैंड्स की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

विश्व पुस्तक मेला का समापन पठन संस्कृति ही ज्ञान आधारित भारत की नींव के संदेश के साथ हुआ। आयोजकों ने घोषणा की कि अगला नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 16 से 24 जनवरी 2027 तक आयोजित किया जाएगा और प्रवेश निःशुल्क रहेगा। यह मेला एक बार फिर साबित कर गया कि किताबें केवल पढ़ने का साधन नहीं, बल्कि संवाद, विचार और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा हैं।

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