इस बार यूपी दिवस पर प्रेरणा स्थल में विकास की झलक संग गूंजेंगे लोक-सुर, विलुप्त कलाओं को मिलेगा मंच

लखनऊ, उत्तर प्रदेश दिवस पर लखनऊ स्थित राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल में इस बार प्रदेश की विकास यात्रा के साथ-साथ लोक-संस्कृति की अनोखी छटा भी देखने को मिलेगी। यूपी दिवस के विभिन्न आयोजनों में गीत-संगीत की सुरमयी धारा बहेगी और प्रदेश की परंपरागत कलाओं का भव्य प्रदर्शन किया जाएगा। संस्कृति विभाग ने कार्यक्रमों को आकर्षक एवं यादगार बनाने के लिए तैयारियां पूर्ण कर ली हैं।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यूपी दिवस को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में गांव से लेकर मण्डल स्तर तक आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में चयनित कलाकारों को अपनी प्रस्तुति देने का अनूठा अवसर प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रमों में उत्तर प्रदेश की विभिन्न लोक कलाएं, लोक जीवन में रची-बसी परंपराएं, गीत, संगीत, नृत्य, नाट्य तथा संगीत के अलग-अलग घरानों की प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी।
पर्यटन मंत्री ने यह भी बताया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ऐसे प्राचीन एवं विलुप्तप्राय वाद्ययंत्रों को भी प्रस्तुत किया जाएगा, जिनका उपयोग अब सामान्य रूप से बहुत कम दिखाई देता है। इससे नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ने और परंपरागत कलाओं को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
उन्होंने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा लोक व शास्त्रीय कलाओं को संरक्षण और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिता “हमारी संस्कृति-हमारी पहचान” (संस्कृति उत्सव 2025-26) के तहत चयनित प्रतिभागियों को यूपी दिवस कार्यक्रम में विशेष मंच दिया जा रहा है। इस बहुस्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेश के मूल निवासी किशोर (14-20 वर्ष) और युवा (21-25 वर्ष) कलाकारों ने गायन, वादन, शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, लोकनाट्य, सुगम संगीत, जनजातीय एवं लोक वाद्ययंत्र तथा काव्य पाठ जैसी विधाओं में प्रतिभा दिखाई।
उन्होंने बताया कि चयनित कलाकारों को 24 से 26 जनवरी, 2026 के बीच राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल, लखनऊ में सम्मानित किया जाएगा और उन्हें पुरस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य अमृत अभिजात ने कहा कि संस्कृति उत्सव 2025-26 के माध्यम से प्रदेश की लोक व शास्त्रीय कलाओं को मजबूत मंच मिला है।





