वृंदावन में खुला ‘बसंती कमरा’, भव्यता देख भक्त भावविभोर

मथुरा, बसंत पंचमी के अवसर पर वृंदावन में स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने ‘शाहजी मंदिर’ के पट विशेष रूप से खोले गए। मंदिर का विश्व प्रसिद्ध ‘बसंती कमरा’ साल में सिर्फ दो बार खुलता है, और आज उसी दुर्लभ नजारे को देखने के लिए देश-विदेश से आए हजारों भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।
शाहजी मंदिर का ‘बसंती कमरा’ अपनी विलासिता और सुंदरता के लिए मशहूर है। बसंत पंचमी पर इस कक्ष को पीले रंग के बेशकीमती बेल्जियम कांच के झाड़-फानूसों और दुर्लभ पेंटिंग्स से सजाया गया। जब सुनहरी रोशनी इन कांच के टुकड़ों से छनकर ठाकुरजी के विग्रह पर पड़ी, तो पूरा मंदिर परिसर किसी दिव्य लोक जैसा नजर आने लगा। भक्तों के लिए यह केवल दर्शन नहीं, बल्कि कला और भक्ति के संगम का एक जादुई अनुभव था।
19वीं सदी में लखनऊ के धनी जौहरी भाइयों, शाह कुंदन लाल और शाह फुंदन लाल द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे ‘टेढ़े खंभों वाला मंदिर’ भी कहा जाता है। बसंत पंचमी पर इन नक्काशीदार टेढ़े खंभों के बीच जब ठाकुरजी का दरबार सजा, तो वहां मौजूद हर भक्त इस वास्तुकला के रहस्य को निहारता रह गया।
शाहजी मंदिर की यह परंपरा दशकों पुरानी है। मंदिर प्रबंधन ने बताया कि ‘बसंती कमरे’ की झलक अब साल भर नहीं मिलेगी। वसंत पंचमी के विशेष दर्शनों के बाद अब इस कक्ष के पट सीधे श्रावण मास (सावन) में होने वाले झूला उत्सव के दौरान ही खुलेंगे। दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं का कहना था कि इस दिव्य नजारे के लिए साल भर का इंतजार भी कम है।
मंदिर की खासियत इसकी स्थापना है जो 1876 में लखनऊ के नवाबों के जौहरियों द्वारा निर्माण कराया गया। बसंती कमरा: साल में केवल दो बार (वसंत पंचमी और सावन) खुलता है।





