यूजीसी के नए नियम के विरोध में केजीएमयू में डॉक्टरों ने किया प्रदर्शन, वापस लेने की मांग

लखनऊ, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में बुधवार को यूजीसी के नए नियम के विरोध में शिक्षकों, रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों ने कुलपति कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु विनियम, 2026” को वापस लेने की मांग की। डॉक्टरों का कहना है कि यह नीति कैंपस में समानता बढ़ाने के बजाय जाति आधारित असमानता को बढ़ावा दे सकती है।

प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने आशंका जताई कि नए नियमों से सामान्य वर्ग को पहले से ही दोषी मान लिया गया है, जिससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा। प्रदर्शन में शामिल डॉ. समीर मिश्रा ने कहा कि इस बिल से यह संदेश जाता है कि सामान्य वर्ग का व्यक्ति अत्याचार करेगा ही करेगा। ऐसे में इसमें सभी वर्गों के लिए समान न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए और शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों को साथ लेकर कानून बनाया जाना चाहिए।

डॉ. अमिय अग्रवाल ने कहा कि यह कानून पूर्व प्रस्तावित कम्युनल वायलेंस बिल जैसा प्रतीत होता है, जिसमें सामान्य वर्ग के व्यक्ति को नैसर्गिक न्याय का अधिकार नहीं मिलता। वहीं डॉ. नवनीत चौहान ने इसे विधि और तर्क के विपरीत बताते हुए कहा कि इसमें सामान्य वर्ग को ही दोषी मान लिया गया है, इसलिए यह कानून वापस होना चाहिए।

डॉ. मनीष बाजपेयी ने कहा कि यह बिल सामान्य वर्ग के खिलाफ है और इसमें संशोधन की गुंजाइश भी नहीं दिखती। प्रो. विभा सिंह ने सरकार से कानून वापस लेने की अपील की। डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि जब समाज में समरसता बढ़ रही है, तब ऐसा नियम भेदभाव को जन्म देगा। उन्होंने कहा कि डॉक्टर इलाज करते समय कभी जाति या धर्म नहीं देखते, ऐसे में सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ यह अन्यायपूर्ण है।

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