राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बैठक के बाद कोलंबिया के रूख में आयी नरमी, संबंधो में सुधार के संकेत
वॉशिंगटन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने व्हाइट हाउस में लगभग दो घंटे तक चली अपनी पहली आमने-सामने की बैठक को ‘मैत्रीपूर्ण’ और ‘सकारात्मक’ बताया है। महीनों से चले आ रहे तीखे बयानों और राजनयिक गतिरोध के बाद इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधरने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के बाद ओवल ऑफिस में श्री ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “हमारी मुलाकात बहुत अच्छी रही। पेट्रो शानदार व्यक्ति हैं।” उनका यह बयान चौंकाने वाला है क्योंकि कुछ ही हफ्ते पहले ट्रंप ने पेट्रो को ‘बीमार’ और ‘नशीली दवाओं का नेतृत्व करने वाला’ व्यक्ति बताया था।
गुस्तावो पेट्रो ने भी सोशल मीडिया पर श्री ट्रंप के साथ हाथ मिलाते हुए फोटो साझा की और अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनकी ‘द आर्ट ऑफ द डील’ पुस्तक पर “यू आर ग्रेट” (आप महान हैं) लिखकर उन्हें समर्पित की।
कोलंबियाई दूतावास में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान पेट्रो ने बताया कि वार्ता में मुख्य रूप से तीन बड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इनमें वेनेजुएला और ऊर्जा, नशीली दवाओं के खिलाफ जंग और इक्वाडोर के साथ व्यापार विवाद की बातें शामिल हैं।
दोनों नेताओं ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की हालिया गिरफ्तारी और वहां अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के बीच, दोनों नेताओं ने वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने पर चर्चा की। गुस्तावो पेट्रो ने कोलंबिया के रास्ते वेनेजुएला की गैस निर्यात करने और ला गुआजीरा क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्रीय ऊर्जा संकट को हल करने का प्रस्ताव रखा।
गुस्तावो पेट्रो ने नशीली दवाओं के अंतरराष्ट्रीय सरगनाओं को पकड़ने के लिए एक ‘ट्रिपल एलायंस’ (अमेरिका, कोलंबिया और इक्वाडोर) का सुझाव दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल किसानों (कोका उत्पादकों) पर कार्रवाई प्रभावी समाधान नहीं है।
कोलंबिया प्रमुख पेट्रो ने इक्वाडोर के राष्ट्रपति डैनियल नोबोआ के साथ जारी ‘ट्रेड वार’ (व्यापार युद्ध) को सुलझाने के लिए अमेरिका से मध्यस्थता का अनुरोध किया। गौरतलब है कि इक्वाडोर ने हाल ही में कोलंबियाई कच्चे तेल के परिवहन शुल्क में 900% की भारी वृद्धि की है।
उल्लेखनीय है कि यह मुलाकात एक ऐसे समय में हुई है जब पिछले साल सितंबर में पेट्रो के न्यूयॉर्क में फलस्तीन समर्थक रैली में भाग लेने और अमेरिकी सैनिकों को ‘आदेश न मानने’ के लिए उकसाने के बाद उनका अमेरिकी वीज़ा रद्द कर दिया गया था। साथ ही, ट्रंप प्रशासन ने श्री पेट्रो और उनके परिवार पर वित्तीय प्रतिबंध भी लगाए थे। यद्यपि इस बैठक के लिए पेट्रो को अस्थायी वीज़ा दिया गया था, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि उनके व्यक्तिगत प्रतिबंधों पर कोई चर्चा नहीं हुई।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक व्यक्तिगत संबंधों में जमी बर्फ पिघलाने वाली तो है, लेकिन सुरक्षा, सैन्य कार्रवाई और ड्रग पॉलिसी जैसे गंभीर मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद अब भी बरकरार हैं।





