रेपो दर में 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित, आरबीआई ने विकास अनुमान बढ़ाया

मुंबई, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को समाप्त मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा है जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर का अनुमान 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने केंद्रीय बैंक की मौद्रिकी नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन की बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा कि भू-राजनैतिक तनाव बढ़ा हुआ है और वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ रहा है। इस बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों से इसे और गति मिलने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि एमपीसी ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। अन्य नीतिगत दरों को भी यथावत रखा गया है। इस प्रकार स्टैंडिग डिपोजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) और लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (एलएएफ) की दर पांच प्रतिशत पर तथा मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी और बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहेगी। समिति ने भविष्य के लिए रुख पहले की तरह तटस्थ बनाये रखा है।

समिति ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 7.3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.4 प्रतिशत कर दिया है। उसने बताया वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.3 प्रतिशत रहेगा। साथ ही अगले वित्त वर्ष की पहली और दूसरी तिमाही जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर क्रमशः 6.9 प्रतिशत और सात प्रतिशत किया है।

चालू वित्त की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में खुदरा महंगाई 3.2 प्रतिशत पर और पूरे वित्त वर्ष के दौरान 2.1 प्रतिशत पर रहने का अनुमान व्यक्त किया है। अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही के लिए खुदरा महंगाई का अनुपात बढ़ाकर चार प्रतिशत और दूसरी तिमाही के लिए 4.2 प्रतिशत किया गया है। श्री मल्होत्रा ने बताया कि इसकी मुख्य वजह सोने-चांदी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारी अनिश्चितता के बावजूद वैश्विक व्यापार मजबूत बना हुआ है। साथ ही, बड़े व्यापार साझेदारों के साथ द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापार समझौतों के कारण भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और निवेश बढ़ेगा।

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