महाशिवरात्रि के लिये आनंदेश्वर मंदिर सजधज कर तैयार,डीएम ने किया निरीक्षण

कानपुर, कानपुर के परमट क्षेत्र में गंगा तट पर स्थित आनंदेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर तैयारी अंतिम चरण में हैं। इस सिलसिले में गुरुवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने मंदिर का निरीक्षण किया और सुरक्षा इंतजामों की पड़ताल की।
जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि महाशिवरात्रि पर उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी व्यवस्थाएं पूर्व से ही दुरुस्त रखी जायें। जिलाधिकारी ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देशित किया कि नियमित सफाई कर्मियों की ड्यूटी रोस्टर के अनुसार लगाई जाए तथा प्रतिदिन उसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों पर विशेष सफाई अभियान चलाया जाए। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं की अलग-अलग कतारें सुनिश्चित करते हुए मजबूत बैरिकेडिंग कराई जाए और प्रमुख स्थानों पर स्पष्ट दिशा-सूचक साइन बोर्ड लगाए जाएं।
प्रकाश व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराने तथा आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त अस्थायी प्रकाश की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्व के दौरान रातभर आवागमन रहेगा, इसलिए अंधेरा या अव्यवस्था की स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पार्किंग की समुचित व्यवस्था, पेयजल की उपलब्धता, पर्याप्त अस्थायी शौचालय तथा भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की प्रभावी तैनाती सुनिश्चित करने को कहा। मंदिर प्रबंधन समिति के साथ बैठक कर उन्होंने समन्वय आधारित कार्ययोजना पर चर्चा की और कहा कि प्रशासन व प्रबंधन आपसी तालमेल से कार्य करें।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिले के सभी प्रमुख शिवालयों में भी इसी प्रकार की तैयारियां सुनिश्चित की जाएं। सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरे, पब्लिक एड्रेस सिस्टम तथा एक समन्वित कंट्रोल रूम स्थापित किया जाए, जिसमें नगर निगम, पुलिस, विद्युत, जल संस्थान सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहें, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जा सके। निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त नगर निगम, पुलिस विभाग, केस्को, जल संस्थान एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि गंगा तट पर स्थित आनंदेश्वर मंदिर में यूं तो हर रोज हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं मगर श्रावण मास के सोमवार और महाशिवरात्रि पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। मध्य रात्रि से ही श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान कर बाबा आनंदेश्वर का जलाभिषेक करने के लिये कतारबद्ध हाे जाते हैं और यह कतार कई किमी की हो जाती है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि आनंदेश्वर के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है। बाबा भक्तों के हर कष्ट को हर लेते है और उन्हे सुख समृद्ध प्रदान करते हैं। मंदिर के इतिहास के बारे में यूं तो कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है मगर बुजुर्गो के अनुसार सैकड़ों साल पहले यहां एक निर्जन वन था जहां एक गाय हर रोज आती है जिसके थनो से दुग्ध की धारा स्वयं प्रवाहित होती थी। गाय के मालिक ने इस स्थान को साफ किया तो यहां स्वंयभू शिवलिंग के दर्शन मिले जिसके बाद यहां मंदिर का निर्माण किया गया जो देखते ही देखते भक्तों के सहयोग से भव्य मंदिर में परिवर्तित हो गया।





