शिक्षकों कम पड़ें तो महाविद्यालय ऑनलाइन कक्षायें उपलब्ध करायें: आनंदीबेन पटेल

लखनऊ, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जहां अध्यापकों की कमी है, वहां शीघ्र नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि जब तक नियुक्तियां न हो जाएं, तब तक विश्वविद्यालय से समन्वय स्थापित कर महाविद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही ‘क्लस्टर व्यवस्था’ विकसित करने पर बल दिया, जिससे आवश्यकतानुसार अध्यापकों का समायोजन कर विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाया जा सके।
मंगलवार को राज्यपाल की अध्यक्षता में जनभवन में डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से संबद्ध अनुदानित एवं राजकीय महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और संस्थानों की शैक्षणिक प्रगति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में राज्यपाल ने अध्यापकों की गुणवत्ता सुधार पर बल देते हुए कहा कि जिन शिक्षकों की पीएचडी पूर्ण नहीं हुई है, वे शीघ्र अपनी पीएचडी पूर्ण करें, जिससे विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं संस्थान तीनों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षण संस्थानों की संख्या बढ़ाने के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया जाए। साथ ही अभिभावकों को प्रेरित किया जाए कि बेटा-बेटी दोनों को समान रूप से शिक्षा उपलब्ध कराएं।
राज्यपाल ने महाविद्यालयों में घटते नामांकन पर चिंता व्यक्त करते हुए निर्देश दिए कि नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। उन्होंने प्राचार्यों से कहा कि वे स्थानीय विद्यालयों और इंटर कॉलेजों से संपर्क बढ़ाएं तथा अभिभावकों के साथ संवाद स्थापित कर अधिक से अधिक विद्यार्थियों को आकर्षित करें।
महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देते हुए उन्होने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग, मंत्रीगण, अधिकारी, प्रधानाचार्य एवं शिक्षक सभी समन्वय स्थापित कर कार्य करें और सामूहिक प्रयासों से समस्याओं का समाधान निकालें। उन्होंने निर्देश दिए कि महाविद्यालय अपनी समस्याओं के समाधान हेतु संबंधित विभागों से निरंतर संपर्क बनाए रखें।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि जिस क्षेत्र में जिस विषय की अधिक मांग है, उसी के अनुरूप पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा में जाति-पाति के बजाय गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए तथा महाविद्यालयों को सोच-समझकर मान्यता प्रदान की जाए।
उन्होने कहा कि नैक मूल्यांकन और एनआईआरएफ रैंकिंग में सक्रिय भागीदारी के लिए महाविद्यालय अपनी गुणवत्ता में सुधार लाकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएं। उन्होंने ई-कंटेंट लाइब्रेरी के अधिक उपयोग और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
राज्यपाल ने शिक्षकों को समय से कक्षाओं में उपस्थित होकर नियमित शिक्षण कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा अधिकारियों को महाविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण (सरप्राइज विजिट) करने के निर्देश दिए, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित हो सके। राज्यपाल ने विद्यार्थियों के प्लेसमेंट, ‘खेलो इंडिया’ में सहभागिता और रोजगारपरक अवसरों से जोड़ने पर विशेष बल दिया। उन्होंने छात्राओं की सुरक्षा, स्वच्छता, नैतिक मूल्यों और सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने राज्यपाल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आया है।





