अंबेडकर जयंती: बाबासाहेब की विरासत पर सियासत

“14 अप्रैल..भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती। लेकिन उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों के ‘अस्तित्व’ की परीक्षा है। 2027 के यूपी विधानसभा चुनावों से पहले, 2026 की यह अंबेडकर जयंती यूपी की राजनीति का टर्निंग पॉइंट बनने जा रही है।” कारण है दलित वोटर क्योंकि उत्तरप्रदेश की राजनीति में दलित वोटबैंक हमेशा से सत्ता कीचाबी रहा है।

यूपी भारत में सबसे अधिक दलित आबादी वाला राज्य है। 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की कुल जनसंख्या 4,13,57,608 थी। यह संख्या राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 20.5% से अधिक है। इसीलिये 2026 में अंबेडकर जयंती के अवसर पर सभी दल जिस तरह ‘मिशन बाबा साहेब’ में जुटे हैं, वह दरअसल अंबेडकर जयंती के बहाने दलितों को अपने पक्ष में लुभाने का राजनैतिक दांव है।

यूपी का प्रत्येक राजनैतिक दल 14 अप्रैल…यानि अंबेडकर जयंती पर अबकी बार कुछ खास करने जा रहा है। इसीलिये उत्तर प्रदेश में 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती (भीम जयंती) बड़ी धूमधाम से मनाई जाएगी।

आईये जानतें हैं अंबेडकर जयंती पर अबकी बार क्या है इन राजनैतिक दलों के कार्यक्रम- सबसे पहले हम बात करतें हैं-

भाजपा
उत्तर प्रदेश में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर भाजपा एक व्यापक अभियान चला रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य दलित वर्ग को जोड़ना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। बीजेपी, आपरेशन दलित के तहत 7 से 12 अप्रैल तक ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान के माध्यम से दलित बस्तियों में रात्रि विश्राम और सामाजिक समरसता कार्यक्रम कर रही है।

2027 के यूपी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुये, अबकी बार पीएम नरेंद्र मोदी ने दलित वोट समेटने की कमान खुद संभाल ली है। इस बार 14 अप्रैल को डॉक्टर आंबेडकर जयंती के मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी दलितों के गढ़ कहे जाने वाले सहारनपुर के बिहारीगढ़ में दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बहाने रैली करेंगे। पीएम का यह दौरा महज एक्सप्रेसवे का उद्घाटन नहीं, बल्कि दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पीछे नहीं हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकर जयंती से पहले एक बड़ा ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, ₹403 करोड़ के बजट वाली योजना के तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में 10-10 अंबेडकर प्रतिमाओं का सौंदर्यीकरण और विकास किया जाएगा। सीएम योगी ने घोषणा की है कि प्रदेश भर में लगी अंबेडकर प्रतिमाओं पर सुरक्षा और सम्मान के लिए ‘छतरी’ या शेड लगवाया जाएगा। अंबेडकर पार्कों की बाउंड्री वॉल बनवाई जाएगी और वहां बैठने की व्यवस्था व आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसी के साथ बीजेपी 13-17 अप्रैल तक स्वच्छता और संपर्क अभियान चलाएगी।

गोरखपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की पावन जयंती के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के द्वारा अपने-अपने बूथ स्तर पर जहां कहीं भी बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की मूर्तियां होंगी, उनके पार्क होंगे उसके आस-पास 13 अप्रैल को स्वच्छता का विशेष अभियान करवाया जाएगा। वहीं, 14 अप्रैल को वहां जाकर के बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि के बड़े कार्यक्रम होंगे। साथ ही सामाजिक न्याय की स्थापना के लिए एक बड़ा कार्यक्रम होगा।” स्पष्ट है कि इस अंबेदकर जयंती पर ‘सबका साथ-सबका विकास’ के नारे के नीचे बीजेपी ‘गैर-जाटव’ दलितों के साथ अब मायावती के कोर वोटर में भी सेंध लगाने की तैयारी में है।”

सपा – PDA
डॉ. भीमराव अंबेडकरकी 135वीं जयंती पर समाजवादी पार्टी ने दलित मतदाताओं के बीच अपनी पैठ मजबूत करने के लिए एक विस्तृत रणनीति तैयार की है। पार्टी अंबेडकर जयंती के माध्यम से अपने ‘PDA’ (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूती देना चाहती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस अवसर को केवल एक उत्सव तक सीमित न रखकर इसे एक राजनीतिक अभियान का रूप दिया है। 14 अप्रैल के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने के लिए सपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं और नेताओं की बड़ी बैठकें आयोजित की गई हैं। जिसमें सपा ने इस वर्ष जिला मुख्यालयों के बजाय गांव-गांव और सेक्टर स्तर पर अंबेडकर जयंती मनाने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य सीधे जमीनी स्तर पर दलित समाज से जुड़ना है। ‘संविधान बचाओ’ जन-जागरण आयोजनों के दौरान सपा कार्यकर्ता “संविधान पर मंडराते खतरे” और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाजवादी पार्टी का स्पष्ट लक्ष्य 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दलित वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करना है। 2027 में सपा सामाजिक न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी। समाजवादी पार्टी अब सिर्फ पिछड़ों की पार्टी नहीं रहना चाहती। अखिलेश का ‘PDA’ फॉर्मूला दलितों के हक और संविधान की रक्षा की बात कर रहा है।
बसपा – ‘नीले किले’ को बचाने की जद्दोजहद

जहां दूसरी पार्टियां दलितों को लुभाने में जुटी हैं, वहीं बहुजन समाज पार्टी के लिए यह अपना किला बचाने की लड़ाई है। मायावती ने 18 मंडलों की बड़ी बैठकें बुलाकर साफ कर दिया है कि ‘बहुजन’ का असली वारिस होने का दावा अबकी बार आंबेडकर जयंती पर वह मजबूती से रखेंगी।

बसपा 14 अप्रैल को लखनऊ के डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल (गोमती नगर) में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसमें पूरे उत्तर प्रदेश के 18 मंडलों के 75 जिलों से लाखों कार्यकर्ताओं के जुटने का अनुमान है। इस रैली को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के औपचारिक अभियान की शुरुआत माना जा रहा है। मायावती ने जिला अध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को भीड़ जुटाने और संगठनात्मक मजबूती के कड़े निर्देश दिए हैं। बसपा ने मार्च के अंत तक बूथ समितियों का पुनर्गठन पूरा कर लिया है। कार्यकर्ता अब गांव-गांव जाकर लोगों को संविधान और बाबासाहेब के विचारों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। दरअसल, कई चुनावों मे दलित वोटों के बिखराव के बाद बसपा अपने कोर वोट बैंक को सहेजना चाहती है। साथ ही दलितों तक ये संदेश भी पहुंचाना चाहती है कि गैर बसपा सरकार उनके हित में नहीं होगी।

कांग्रेस- ‘संविधान’ की रक्षा

अंबेडकर जयंती पर कांग्रेस पार्टी ने अपने परंपरागत दलित वोट बैंक को वापस पाने के लिए राज्यव्यापी कार्यक्रमों की योजना बनाई है। पार्टी इस अवसर का उपयोग सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए कर रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में अंबेडकर जयंती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। कांग्रेस कार्यकर्ता जिला स्तर पर सभाएं करेंगे, जिसमें वे संविधान की सुरक्षा और दलितों के अधिकारों के लिए कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान पर चर्चा करेंगे। कांग्रेस का लक्ष्य अंबेडकर जयंती के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के दलित मतदाताओं तक सीधे पहुंच बनाना है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को दोबारा हासिल किया जा सके।
आज़ाद समाज पार्टी , कांशीराम

आंबेडकर जयंती पर उत्तर प्रदेश में आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) का मुख्य उद्देश्य दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों (बहुजन) को संगठित कर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन करना है, ताकि 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार की जा सके, इसलिए पार्टी 14 अप्रैल को पूरे प्रदेश में रैलियां और गोष्ठी करेगी। आसपा अंबेडकर जयंती को ‘समानता दिवस’ के रूप में मनाते हुए “संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ” आयोजन कर जनता से जुड़ने का काम करेगी।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चन्द्र शेखर आज़ाद के नेतृत्व में कई महत्वपूर्ण आयोजन किए जा रहे हैं। अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर 13 अप्रैल 2026 को लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेई साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य दलित अधिकारों की बात करना और पार्टी की ताकत दिखाना है। आजाद समाज पार्टी अंबेडकर जयंती के माध्यम से चुनाव के लिए अपना अभियान तेज कर रही है।

गाँव-गाँव जाकर ‘भाईचारा कमेटियाँ’ बनाने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने का काम चल रहा है। चन्द्र शेखर आज़ाद खुद राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए ‘मिशन 2027’ पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
इसके अलावा अन्य छोटे दल और सामाजिक संगठन भी जयंती पर बड़े आयोजन करने जा रहे है। सांसद चन्द्र शेखर आज़ाद ने दावा किया है कि यूपी में अंबेडकर जयंती मनाने के लिए अनुमति न मिलने की उन्हें लगभग 5000 शिकायतें मिली हैं। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा है और समर्थकों से एकजुट होने की अपील की है।

” ये सच है कि राजनीति प्रतीकों पर चलती है,लेकिन दलितों का दिल अब केवल नारों से नहीं जीत जा सकता। दलित युवा अब केवल ‘जय भीम’ के नारे नहीं,बल्कि हाथ में रोजगार और आंखों में सम्मान चाहते हैं।” हाथरस से लेकर प्रयागराज की घटनाएं याद दिलाती हैं कि दलितों के लिये सुरक्षा और सम्मान आज भी बड़ी चुनौतियां हैं। उत्तर प्रदेश की राजनीति का इतिहास बताता है कि यूपी की सत्ता का रास्ता दलित बस्तियों से होकर गुजरता है। इसलिये 2026 की अंबेडकर जयंती महज एक उत्सव नहीं, बल्कि 2027 के महासंग्राम का शंखनाद है। देखना होगा कि दलित मतदाता किसके वादों पर कितना भरोसा करता है और किसके हाथ में सौंपता है यूपी की चाबी।”

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