लखनऊ, उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के अप्रत्याशित चुनाव परिणाम देखकर विपक्षी दलों ने एक बार फिर इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से चुनाव कराने का विरोध किया है।भाजपा पर ईवीएम मे गड़बड़ी करने का आरोप लगाते हुये सपा, बसपा और कांग्रेस तीनों ने ही 2019 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग उठाई है।
एक बार फिर सबसे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने 2019 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग करते हुये बीजेपी को चुनौती दे डाली।मायावती ने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव हो तो भाजपा पावर में आने वाली नहीं। मायावती ने कहा कि भाजपा को 2014 में ईवीएम में गड़बड़ी कर सत्ता मिली। 2017 में पूर्ण बहुमत से बीएसपी की सरकार बननी थी लेकिन, ईवीएम में छेडख़ानी कर दी गई। बीजेपी बीएसपी को खत्म करना चाहती है। निकाय चुनाव में हम दूसरे नंबर पर हैं। मेरठ और अलीगढ़ इसके उदाहरण हैं। उन्होंने 2019 का आम चुनाव बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की और कहा कि बीजेपी कहती है कि जनसमूह उसके साथ है। बैलेट पेपर से चुनाव हो तो सच सामने आ जाएगा।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आज कोलकाता में पार्टी के राज्य सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।अ खिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के बारे में खुलासा किया कि जहां ईवीएम से मतदान हुआ वहां भाजपा ने 46 फीसद सीटें जीतीं और जहां बैलेट पेपर से वहां मात्र 15 फीसदी सीटें ही जीत पाई है।कहा कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी कर उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव जीती है। उन्होंने कहा कि अफवाह फैलाई जा रही है कि कांग्रेस व सपा गायब हो गई है। ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से भाजपा जीती है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है कि जहां बैलेट पेपर से चुनाव हुए वहां भाजपा का मत प्रतिशत या तो बहुत कम हो गया या वहां वह हार गई। अखिलेश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कहीं विकास नहीं हुआ है। भाजपा विकास का झूठा दावा कर रही है। झूठ बोलना भाजपा की आदत है।
कांग्रेस ने भी ईवीएम से मतदान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किये।कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपक सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव के अप्रत्याशित चुनाव परिणाम से साबित है कि भाजपा का जनाधार घट रहा है। न्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से ही होने चाहिये।