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तेजस्वी यादव ने की दिल की बात, खोले कुछ अहम राज

नई दिल्ली, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने दिल की बात मे कई अहम राज  खोल दियें हैं। उन्होने घर परिवार मे आपस के रिश्तो और पिता के महत्व का भी जिक्र किया। अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की सगाई पर पिता लालू यादव को किस तरह   तेजस्वी यादव ने मिस किया , इसका जिक्र उन्होने फेसबुक पर अपनी एक पोस्ट मे किया है। साथ ही एक फोटोग्राफ भी शेयर की है, जिसमे वह स्वयं, मां पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, भाई पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव व भाई की भावी पत्नी एेश्वर्या हैं-

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“दिल की बात- तेज़ भाई की सगाई और पिता जी की अनुपस्थिति”

हम सभी नौ भाई-बहनों ने जीवन के हर सफर की शुरुआत हमेशा हमने पिताजी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लेकर ही की है, लेकिन कल मन थोड़ा व्यथित था कि तेज़ भाई के नए सफर की शुरुआत में उनका विराट व्यक्तित्व शारीरिक रूप से ख़ुशी की घडी में हमारे साथ शरीक नहीं था।

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सुख के क्षणों में हमने पिता की कमी महसूस की। हालाँकि मानसिक और वैचारिक रूप से सदैव वो हमारे अंग-संग रहते है।

बचपन से सुनते आया हूँ वो हमें अक्सर कहते है, जो जनसेवा को समर्पित हो उसका कोई निजी जीवन नहीं होता, निजी खुशियां नहीं होती, निजी दुःख नहीं होता। जन-जन के संघर्ष के आगे परिवार की खुशियों का कोई मोल नहीं है। भाई के सगाई समारोह में पिता जी की यही बात बार-बार याद आ रही थी। भाई के नए सफर पर पिता के आशीर्वाद का हाथ उनके सिर पर नहीं था, ये शायद पहली बार था। पिता की कमी बहुत खली, लेकिन उनकी ये सीख हमारे साथ रही की निजी सुख-दुःख से ऊपर होकर हमारा जीवन बिहार के लिए समर्पित है और रहेगा।

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कई बार समझौते आपको और आपके परिवार को सुकून के पल और खुशियां दे जाते हैं । मेरे पिता ने आवाम के हितों से कभी समझौता नहीं किया। विकट से विकट परिस्थिति में भी भी अपने विचार, नीति और सिद्धांत को नहीं छोड़ा और यही कारण है कि सुखद क्षण में वो हमारे साथ नहीं है।

मुझे गर्व की अनुभूति होती है कि मैं एक ऐसे पिता का बेटा हूं जिसने अपना जीवन बिहार के लिए, बिहार के लोगों के लिए, शोषितों, पीड़ितों, वंचितो और दबे-कुचलों के लिए समर्पित कर दिया जिसे जेल जाना मंजूर था लेकिन झुकना नहीं।

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बिहार की इस संघर्ष यात्रा में ख़ुशी के पल भी कुछ उदास हैं लेकिन हमारे साथ हमारे पिताजी का दिया आत्मबल और विश्वास है। हम भी साधारण इंसान है इसलिए दुख हुआ लेकिन बिहार के लोगों के मान-सम्मान की लड़ाई मे यह दुख बहुत छोटा पड़ गया।

सत्यमेव जयते।