यूपी की बड़ी उपलब्धि, फिर शुरू हो रहा ये खास अभियान

लखनऊ, उत्तर प्रदेश कई क्षेत्रों में बढ़-चढ़कर कम कर रहा है । स्वास्थ्य के क्षेत्र में यू पी ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज लखनऊ में स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटजीज द्वारा संयुक्त रूप से एक राज्य स्तरीय मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अमित कुमार घोष, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह अभियान जन-आंदोलन बन चुका है, जिसमें सरकार, मीडिया, डेवलपमेंट पार्टनर्स और समुदाय की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।

कार्यशाला की अध्यक्षता अमित कुमार घोष, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा द्वारा की गई एवं टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश पर ई-न्यूजलेटर का विमोचन किया गया।

मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तर प्रदेश ने अपने संबोधन में बताया कि राज्य ने टीबी उन्मूलन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2015 की तुलना में टीबी इन्सिडेन्स अर्थात नए रोगियों की दर में 17 प्रतिशत की कमी लाई गई है। इस उपलब्धि में प्रयोगशाला जांच नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मिशन निदेशक ने यह भी बताया कि टीबी रोगियों को उपचार के साथ-साथ सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई नि:क्षय मित्र पहल के अंतर्गत राज्य में अब तक 98.9 हजार नि:क्षय मित्रों द्वारा 10.3 लाख टीबी रोगियों को पोषण किट उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इस पहल से न केवल उपचार की निरंतरता सुनिश्चित हुई है, बल्कि उपचार की सफलता दर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है।

 

इस अवसर पर राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र भटनागर ने कहा कि वर्ष 2024 में चलाए गए 100-दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, जिसमें बड़ी संख्या में छूटे हुए टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें उपचार से जोड़ा गया। इसी अनुभव के आधार पर फरवरी 2026 से प्रदेश में पुनः 100 दिवसीय सघन टीबी मुक्त भारत अभियान शुरू किया जाएगा, जिसके अंतर्गत सांसदों से लेकर पंचायत स्तर तक जनप्रतिनिधियों, आशा-आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वैच्छिक संगठनों और मीडिया की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी।

डॉ. भटनागर ने बताया कि आगामी अभियान के दौरान प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक जागरूकता गतिविधियाँ चलाई जाएँगी, औद्योगिक क्षेत्रों, शहरी मलिन बस्तियों एवं जोखिम वाले समूहों में सघन स्क्रीनिंग की जाएगी तथा माई भारत वालंटियर्स के सहयोग से जन-जागरूकता को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि फरवरी से शुरू होने वाला 100-दिवसीय अभियान उत्तर प्रदेश को टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के और अधिक निकट ले जाएगा।

डॉ. शुभा मिश्रा, निदेशक (राष्ट्रीय कार्यक्रम) ने कार्यशाला का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि टीबी उन्मूलन की दिशा में उत्तर प्रदेश द्वारा की गई प्रगति यह दर्शाती है कि मजबूत नेतृत्व, डेटा आधारित रणनीति और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन से ठोस परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। डॉ. मिश्रा ने मीडिया से अपील की कि वे टीबी से जुड़े सामाजिक मिथकों को समाप्त करने, लक्षणों की समय पर पहचान और सरकारी सेवाओं की जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने में साझेदार की भूमिका निभाएँ। उन्होंने स्पष्ट किया कि “टीबी मुक्त भारत” का लक्ष्य तभी संभव है, जब सरकार, मीडिया और समुदाय मिलकर साझा जिम्मेदारी निभाएँ।

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