2027 तक भारत को फाइलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य : आराधना पटनायक

लखनऊ, केंद्रीय अपर स्वास्थ्य सचिव, सह निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन आराधना पटनायक ने कहा कि “भारत को 2027 तक फाइलेरिया मुक्त करना हमारा साझा लक्ष्य है। इसके लिए आगामी 10 फरवरी 2026 से शुरू होने वाले सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम में सभी राज्यों को 95 फीसद से अधिक लोगों को स्वास्थ्यकर्मियों के सामने दवा खिलाने का लक्ष्य हासिल करना होगा।”

भारत को वर्ष 2027 तक फाइलेरिया मुक्त बनाने के लक्ष्य के तहत सोमवार से लखनऊ में दो दिवसीय उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की शुरुआत हुई। बैठक का आयोजन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

बैठक का वर्चुअल उद्घाटन करते हुए आराधना पटनायक ने पांच स्तरीय रणनीति को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर बल दिया और कहा कि “फाइलेरिया उन्मूलन भारत की एकजुट सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता बननी चाहिए।”

महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश डॉ. आर.पी. सिंह सुमन ने कहा कि उत्तर प्रदेश इस दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है। “राज्य के 51 जिलों के 782 विकासखंड फाइलेरिया प्रभावित हैं, जिनमें से 544 (70 फीसद) विकासखंडों ने संक्रमण दर को एक प्रतिशत से नीचे लाने में सफलता पाई है। हमें अब इन क्षेत्रों में गतिविधियों को और सुदृढ़ करना है।”

निदेशक, एनसीवीबीडीसी (भारत सरकार) डॉ. तनु जैन ने कहा कि भारत के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 348 फाइलेरिया प्रभावित जिलों में से 143 (41 फीसद) जिलों ने संक्रमण दर को 1 फीसद से कम करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि “स्वयं सहायता समूहों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और विकास साझेदारों के संयुक्त प्रयास से हम इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।”

वरिष्ठ मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एनसीवीबीडीसी, भारत सरकार, डॉ. सुदर्शन मंडल ने कहा कि भारत फाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सामूहिक दवा सेवन, सर्वेक्षण, रिपोर्टिंग और अंतरविभागीय समन्वय को और मजबूत करने पर बल दिया।

बैठक में भारत सरकार एवं विभिन्न राज्यों से आए मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल और असम के राज्य कार्यक्रम अधिकारी, गेट्स फाउंडेशन, डब्ल्यूएचओ, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल, ग्लोबल हेल्थ स्ट्रैटजीज, पाथ और डब्लू.जे.सी.एफ. के राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय अधिकारी उपस्थिति थे।

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