ब्रिक्स 2026 का लोगो और वेबसाइट लॉन्च

नई दिल्ली, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि इस वर्ष भारत की अध्यक्षता के दौरान होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्‍मेलन की प्रमुख प्राथमिकताएं लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता होंगी। ब्रिक्स समिट के लोगो, थीम और वेबसाइट की लॉन्चिग के अवसर पर विदेश मंत्री ने कहा कि ये प्राथमिकताएं समूह के तीन मूलभूत स्तंभों – राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक तथा वित्तीय और सांस्कृतिक एवं जन-समुदाय आदान-प्रदान – के लिए एक सुसंगत ढांचा प्रदान करेंगी।

ब्रिक्स-2026 का लोगो भारतीय पहचान और ब्रिक्स की सामूहिक प्रकृति को दर्शाता है। इसका आकार कमल से प्रेरित है, जो भारत का राष्ट्रीय फूल है। डिजाइन के केंद्र में, आंतरिक पंखुड़ियां दो हाथों को नमस्ते करते हुए दिखाती हैं, जो आमतौर पर अभिवादन और सम्मान का संकेत है। पांच पंखुड़ियां ब्रिक्स के संस्थापक देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के रंगों में हैं, जो विविध देशों के बीच एकता को दर्शाती हैं।

डॉ. जयशंकर ने लॉन्चिंग के बाद सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ब्रिक्स इंडिया 2026 की तैयारियों की शुरुआत राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और पबित्रा मार्गेरिटा के साथ वेबसाइट, थीम और लोगो के अनावरण के साथ की गई। ब्रिक्स की भारत की अध्यक्षता लचीलेपन, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी के लिए ‘मानवता-पहले’ और ‘जन-केंद्रित’ दृष्टिकोण अपनाएगी।

कार्यक्रम के दौरान लोगो और वेबसाइट का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह विषय सभी के हित के लिए क्षमताओं को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और सतत विकास सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल देता है। उन्होंने कहा कि लोगो बिक्स सदस्यों के बीच एकता और विविधता को दर्शाता है, जबकि ब्रिक्स इंडिया वेबसाइट भारत की अध्यक्षता के दौरान एक साझा मंच के रूप में कार्य करेगी, जो बैठकों, पहलों और परिणामों की जानकारी प्रदान करेगी तथा सूचना के समय पर प्रसार और बेहतर सहभागिता को सक्षम बनाएगी।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का उद्देश्य “वैश्विक कल्याण के लिए ब्रिक्स देशों की क्षमता को एकजुट करना” होगा। उन्होंने कहा कि भारत 2026 में “समूह की यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़” पर अध्यक्षता ग्रहण करेगा, क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है।

उन्होंने कहा पिछले कुछ वर्षों में ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में लगातार विकसित हुआ है। समूह ने जन-केंद्रित विकास, संवाद एवं व्यावहारिक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने एजेंडे तथा सदस्यता का विस्तार भी किया है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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