बसपा ने पहला प्रत्याशी घोषित कर, किया ये धमाका ?

2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव की तैयारियों को तेज कर दिया है। जहां समाजवादी पार्टी दूसरे दलों के दिग्गज नेताओं को सपा में शामिल करवा रही है। वहीं, इसी कड़ी में आज बसपा ने अपना पहला प्रत्याशी घोषित कर दिया है। जालौन जिले की माधौगढ़ सीट से अपना कैंडिडेट का ऐलान कर बसपा ने चुनाव का शंखनाद कर दिया है।
आज जालौन में आयोजित एक संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी के मुख्य मंडल प्रभारी लालाराम अहिरवार ने आगामी चुनाव के लिए आशीष पांडे के नाम का ऐलान किया. पार्टी आलाकमान के निर्देश पर आशीष पांडे को माधौगढ़ क्षेत्र में बसपा का आधार मजबूत करने और आगामी चुनाव में जीत दर्ज करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने जालौन की माधौगढ़ सीट के लिए आशीष पांडेय को प्रभारी घोषित कर बडा संदेश देनें की कोशिश की है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बसपा ने आशीष पांडेय का नाम आगे कर दो स्पष्ट संदेश दियें हैं। पहला, बसपा अक्सर उम्मीदवारों की घोषणा में देरी करती रही है, लेकिन इस बार समय से पहले प्रत्याशी का नाम घोषित कर, उन्होने दूसरे दलों से लीड ले ली है। और ये संदेश दिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उसकी तैयारी दूसरे दलों से कहीं ज्यादा है।
दूसरा, लगातार ब्राह्मणों के सम्मान की बात कर रही बसपा ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सबसे पहले ब्राह्मण प्रत्याशी की घोषणा कर ये संदेश दिया है कि वह एक बार फिर “ब्राह्मण + मुस्लिम + दलित” सामाजिक समीकरण को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है।
जालौन जिले के माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या निर्णायक भूमिका निभाती है. आशीष पांडे को प्रत्याशी बनाकर बसपा ने विपक्षी दलों के लिए नई चुनौती पेश की है
माधौगढ़ विधानसभा दो तहसीलों की विधानसभा है, जिसमें कोंच और माधौगढ़ तहसील है। लगभग 100 किलोमीटर से अधिक लंबाई की विधानसभा है। जिसमें 475 छोटे-बड़े गांव आते हैं। ये विधानसभा क्षेत्र दो तरफ से नदियों से घिरा है। उत्तर में चंबल और यमुना का मिलान होता है। पश्चिम में सिंधु, मृगा और पहूज नदी है। यहां पचनदा पर सभी नदियों का मिलान होता है।
जिले की माधौगढ़ सीट पर विधानसभा चुनाव हमेशा से दिलचस्प रहा है। यहां पर आजादी के कुछ साल बाद 1962 से 1985 तक कांग्रेस का कब्जा रहा। रियासती घरानों का रसूख कम होने के बाद यहां हाथी ने दौड़ना शुरू कर दिया। 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी राजा राजेंद्र शाह को हराकर बसपा से शिवराम कुशवाहा ने जीत दर्ज की। तब से बसपा पार्टी का ऐसा जनाधार बढ़ा कि वर्ष 1989, 1993, 2002, 2007, 2012 में बसपा का विधायक ही चुना गया।
वर्तमान में भाजपा से विधायक मूलचंद निरंजन माधौगढ़ विधानसभा से दूसरी बार विधायक हैं। उन्होने 2017 में पहली बार और 2022 में माधौगढ़ सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। माधौगढ़ सीट पर बीजेपी के मूल चंद्र 34,974 वोट से जीते थे. जबकि बसपा की शीतल कुशवाहा दूसरे स्थान पर रहीं. मूल चंद्र को कुल 1,05,231 वोट मिले, जबकि शीतल कुशवाहा 70,257 वोट के साथ दूसरे नंबर पर रहीं. वहीं सपा के राघवेंद्र प्रताप सिंह 63,035 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे.





