लखनऊ, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने युवाओं और किसानों के मिल रहे भारी समर्थन से उत्साहित होकर चौंकाने वाला बयान दिया है।
अलीगढ़ के टप्पल में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में उमड़े किसानों व युवाओं के जन समूह से उत्साहित अखिलेश यादव ने वहां की फोटो शेयर करते हुये ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है। जहां उनको सुनने भारी संख्या मे लोग उमड़े थे।
उन्होने कहा कि सपा द्वारा अलीगढ़ के टप्पल में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में उमड़ा किसानों का सैलाब व युवाओं का जन समूह दिखा गया है कि भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए जनता कितनी एकजुट हो चुकी है. अब भाजपाइयों की ‘घेराबंदी और घरबंदी’ का दौर शुरू हो गया है. #बाइस_में_बाइसिकल #नयी_हवा_है_नयी_सपा_है।
सपा द्वारा अलीगढ़ के टप्पल में आयोजित ‘किसान महापंचायत’ में उमड़ा किसानों का सैलाब व युवाओं का जन समूह दिखा गया है कि भाजपा को उखाड़ फेंकने के लिए जनता कितनी एकजुट हो चुकी है.
अब भाजपाइयों की ‘घेराबंदी और घरबंदी’ का दौर शुरू हो गया है. #बाइस_में_बाइसिकल#नयी_हवा_है_नयी_सपा_है pic.twitter.com/Ipe9Idds33
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 7, 2021
इससे पहले अखिलेश यादव ने यमुना एक्सप्रेस-वे के टप्पल इंटरचेंज पर किसान महापंचायत को संबोधित कर रहे थे। वे यहां हजारों की तादाद में किसान उनको सुनने के लिए जुटे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता और संचालन जिलाध्यक्ष गिरीश यादव और पूर्व सांसद चौ. बिजेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया। पूर्व सीएम ने तीनों नये कृषि कानूनों का खुल कर विरोध किया और कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी कहते हैं स्ट्रॉबेरी की खेती में मुनाफा होता है, लेकिन धान और मक्का किस भाव पर खरीदी जा रही है, किसानों को कितना घाटा हो रहा है। इस पर बात नहीं करते हैं। शांता कुमार कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार देश में 42 हजार अनाज मंडियों की जरूरत है, लेकिन केवल सात हजार मंडियां हैं।
उन्होने आगे कहा कि कोरोना काल में जब देश में दवाओं और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ी तो चंद कारोबारियों ने नये कृषि कानूनों की रूपरेखा तय करा दी और कुछ लोगों के हाथों में सब कुछ देने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि जब अनुबंध पर खेती होगी तो मालिक कोई और होगा। ऐसे में जब खेत नहीं रहेंगे तो अन्नदाता, उसका परिवार और पीढ़ियां कैसे जिंदा रहेंगी। कोरोना काल में जब सब काम धंधे बंद हो गए तो किसान खेत पर डटे रहे। इसी वजह से देश की अर्थव्यवस्था संभल पाई। जीडीपी की बात करने वाले नेता उसमें कृषि और किसान के योगदान की बात नहीं करते हैं। उलटे आज सरकारें किसानों को अपमानित कर रही है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। दिल्ली में किसान धरने के 100 दिन हो गए हैं। उनकी ये लड़ाई ही भारत का भविष्य तय करेगी।
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि तीन नये कृषि कानून की लड़ाई लड़ रहे किसानों के साथ सपा पहले दिन से है। किसानों का आंदोलन हो या राकेश टिकैत प्रकरण, हर जगह सपा ने पूरा साथ दिया है।