हाई-रिस्क मरीज पर हाई-टेक सर्जरी, फोर्टिस गुरुग्राम की बड़ी उपलब्धि

गुरुग्राम , फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में डॉक्टरों ने 29 वर्षीय मरीज की जान बचाने के लिए एक दुर्लभ हाइब्रिड हार्ट सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।जिसमें मरीज की छाती और पेट की सबसे बड़ी नस फट चुकी थी।
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में डॉक्टरों ने एक बहुत ही दुर्लभ और जटिल हाइब्रिड हार्ट सर्जरी करके 29 साल के युवक की जान बचाई है। यह सर्जरी उस समय की गई जब मरीज की छाती और पेट की सबसे बड़ी नस (थोरेसिक एब्डॉमिनल एओर्टा) फट चुकी थी। डॉक्टरों के अनुसार, यह दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी तरह का पहला मामला है।
मरीज की हालत बेहद गंभीर थी
बिहार के पलामू जिले के रहने वाले सैफ असलम (29 वर्ष) कई महीनों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। शुरू में कई अस्पतालों में उनकी बीमारी को गलत समझ लिया गया। इलाज के बजाय उनकी हालत और बिगड़ती गई और अंदरूनी खून बहना बंद नहीं हो रहा था।
समय के साथ उनका दिल सिर्फ 15% तक ही काम कर रहा था। वह करीब एक महीने तक बिस्तर से उठ भी नहीं पा रहे थे। बिहार, कोलकाता और बेंगलुरु के कई अस्पतालों ने हालत ज्यादा खराब होने के कारण उनका ऑपरेशन करने से मना कर दिया।
फोर्टिस गुरुग्राम बना उम्मीद की आखिरी किरण
जब सैफ को फोर्टिस गुरुग्राम लाया गया, तो यहां डॉक्टरों की टीम ने पूरी जांच की। जांच में पता चला कि उनकी छाती और पेट की मुख्य नस बहुत ज्यादा फैल चुकी थी और कई जगह से फट चुकी थी। इससे किडनी, लिवर और आंतों तक सही मात्रा में खून नहीं पहुंच पा रहा था।
सामान्य सर्जरी संभव नहीं थी
डॉक्टरों ने बताया कि अगर सामान्य ओपन सर्जरी की जाती तो लकवा होने या जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा था। इसलिए डॉक्टरों ने एक खास तरह की हाइब्रिड सर्जरी करने का फैसला लिया।
कैसे की गई यह खास सर्जरी
- इस सर्जरी में पहले बायपास सर्जरी की गई
- फिर बिना बड़ा चीरा लगाए स्टेंट ग्राफ्ट लगाया गया
- इससे फटी हुई नस बंद हो गई और शरीर के सभी जरूरी अंगों तक खून फिर से सही तरीके से पहुंचने लगा
- पूरी सर्जरी के दौरान रीढ़ की नस की लगातार निगरानी की गई ताकि लकवा न हो।
डॉ. उद्गीथ धीर ने बताया कि इस सर्जरी में मरीज के बचने की संभावना केवल 50% थी, लेकिन डॉक्टरों की मेहनत और सही इलाज से सैफ की जान बच गई।
छह दिन में अस्पताल से छुट्टीio
सफल सर्जरी के बाद सैफ की हालत में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें सिर्फ छह दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल उनका दिल दवाओं के जरिए संभाला जा रहा है।
मरीज ने कहा – अब फिर से जीने की उम्मीद
सैफ असलम ने कहा, “मैंने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। फोर्टिस गुरुग्राम के डॉक्टरों ने मुझे नया जीवन दिया है।”
फोर्टिस गुरुग्राम की बड़ी उपलब्धि
फोर्टिस गुरुग्राम के फैसिलिटी डायरेक्टर यश रावत ने कहा कि यह केस साबित करता है कि फोर्टिस गुरुग्राम बहुत मुश्किल और जानलेवा बीमारियों के इलाज में देश के सबसे भरोसेमंद अस्पतालों में से एक है।





