हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस रिव्यू — ज़्यादा शोर, कम असर

 

फिल्म रिव्यू: हैप्पी पटेल खतरनाक जासूस, आमिर खान की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती

नई दिल्ली, आमिर खान की फिल्मों से दर्शकों को हमेशा कुछ खास उम्मीद रहती है। उनकी फिल्में अक्सर मनोरंजन के साथ कोई बात भी कहती हैं। लेकिन इस बार रिलीज़ हुई हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस उस स्तर तक नहीं पहुंच पाती।

आमिर खान की फिल्मों का नाम आते ही दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। उनकी फिल्में अक्सर मनोरंजन के साथ कोई संदेश भी देती हैं। ऐसे में जब हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस रिलीज़ होती है, तो दर्शक कुछ अलग और खास देखने की उम्मीद करते हैं। यह फिल्म कॉमेडी, जासूसी और गैंगस्टर ड्रामा को मिलाने की कोशिश करती है, लेकिन क्या यह उम्मीदों पर खरी उतर पाती है—आइए जानते हैं इस रिव्यू में।

कहानी में कितना दम?

फिल्म की कहानी जासूसी, गैंगस्टर और कॉमेडी के मेल पर आधारित है। मरते इंसान से दिवाली बोनस मांगना, डॉन बनने के लिए कुकिंग कॉम्पिटीशन और ऐसा जासूस जो हिंदी नहीं बोल पाता—ये सब सुनने में दिलचस्प लगता है।

लेकिन स्क्रीन पर कहानी बिखरी हुई नज़र आती है। कई सीन जबरदस्ती हंसाने की कोशिश करते हैं, जिससे फिल्म की पकड़ ढीली पड़ जाती है।

कलाकारों का हाल

वीर दास कुछ दृश्यों में ठीक प्रदर्शन करते हैं, लेकिन उनका किरदार पूरी तरह प्रभाव नहीं छोड़ पाता। शारिब हाशमी अपनी कॉमिक टाइमिंग से फिल्म को संभालते हैं और कुछ जगह हंसी भी दिलाते हैं। आमिर खान फिल्म में सीमित समय के लिए नज़र आते हैं, लेकिन उनसे जैसी उम्मीद रहती है, वैसा असर उनके किरदार से नहीं बन पाता।

निर्देशन की पकड़

वीर दास ने इस फिल्म से निर्देशन में कदम रखा है। उन्होंने कुछ अलग और हटकर करने की कोशिश की है, जो सराहनीय है। हालांकि, कमजोर स्क्रिप्ट और ढीले निर्देशन के कारण फिल्म कई जगह भटकती हुई महसूस होती है।

संगीत और गाने

फिल्म का एक गाना ध्यान खींचता है, लेकिन बाकी संगीत औसत है। गाने कहानी को आगे बढ़ाने में ज्यादा मदद नहीं कर पाते।

फिल्म की खूबियां

फिल्म के कुछ सीन मज़ेदार हैं। कुछ डायलॉग्स हल्की हंसी दिलाते हैं। कहीं-कहीं सामाजिक तंज भी नजर आते हैं।

कहां चूक गई फिल्म

कमज़ोर लॉजिक,ज़रूरत से ज़्यादा डबल मीनिंग जोक्स,

कहानी में कसाव की कमीऔर निराश करने वाला क्लाइमैक्स।

आख़िरी फैसला

अगर आप हल्की-फुल्की, बिना दिमाग लगाए देखी जाने वाली कॉमेडी पसंद करते हैं, तो हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस एक बार देखी जा सकती है।

लेकिन आमिर खान की फिल्मों से जो दम और गहराई की उम्मीद रहती है, वह इस बार अधूरी रह जाती है।

 

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