बिहार से खत्म हुआ परिवारवाद ?

ये बड़े खुशी की बात है कि कम से कम देश के एक राज्य से परिवारवाद की समाप्ति हो गई है। और वह राज्य है बिहार, जिसके मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने परिवारवाद को प्रदेश से पूरी तरह समाप्त कर दिया है। वह परिवारवाद को लेकर अक्सर आरजेडी व कांग्रेस को निशाना बनाते रहें हैं। परिवारवाद पर लालू यादव के परिवार को दिव्य ज्ञान देने वाले और कांग्रेस मे राहुल गांधी को परिवारवाद की देन बताने वाले नितीश कुमार ने आज पूरी तरह से बिहार से इसे समाप्त कर दिया है।
परिवारवाद या वंशवाद, राजनीति की वह पद्धति है जिसमें सत्ता, पद और प्रभाव एक ही परिवार के सदस्यों के बीच सिमटा रहता है। यानि
‘राजनीति में परिवारवाद (Dynasty Politics/Nepotism) वह प्रथा है जिसमें किसी स्थापित नेता के रिश्तेदार, जैसे बच्चे या पत्नी, योग्यता के बजाय पारिवारिक संबंधों के आधार पर पार्टी या सरकार में प्रमुख पद पाते हैं। यह वंशवादी राजनीति लोकतंत्र में आंतरिक लोकतंत्र को कम करती है, समान अवसर को बाधित करती है और योग्यता पर परिवार को प्राथमिकता देती है।
सरल शब्दों में, जब किसी पार्टी या सरकार की कमान योग्यता के बजाय “खून के रिश्तों” (जैसे बेटा, बेटी, बहू, भतीजा) के आधार पर अगली पीढ़ी को सौंप दी जाती है, तो उसे परिवारवाद कहा जाता है।
जब किसी विशेष विचार या व्यवस्था को एक व्यवस्थित ढांचे (System) के रूप में अपनाया जाता है, तो उसके पीछे ‘वाद’ जुड़ जाता है। कोई भी वाद समाज में कुछ लोगों द्वारा ही अपनाया जाता है और उस वाद के विरोधी भी होते हैं जो उस विचारधारा का विरोध करतें हैं। लेकिन जब विरोधी भी वही काम करने लगें तो वह वाद नही रह जाता है एक सामान्य बात हो जाती है ।
आज बिहार में परिवार वाद अब इसी रूप में आ गया है। परिवारवाद के कट्टर विरोधी और बिहार के सीएम नितीश कुमार ने भी इसे अपना लिया है। परिवारवाद का सबसे ज्यादा विरोध करने वाली पार्टी बीजेपी ने तो अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष ही परिवारवाद से चुना है और वह भी बिहार से। तो अब बिहार में परिवार वाद कहां है? इसीलिये मैं कह रहा हूं कि बिहार से अब परिवारवाद समाप्त हो गया है।
राजद के संस्थापक और पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव के परिवारवाद का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले बिहार के सीएम नितीश कुमार और बीजेपी ने परिवारवाद पर क्या – क्या कहा इसे भी जान लीजिये-
जनवरी 2024 को कर्पूरी ठाकुर जयंती पर नितीश कुमार ने पटना में एक रैली के दौरान लालू यादव पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा कि “जननायक कर्पूरी ठाकुर ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया, लेकिन आजकल कुछ लोग केवल अपने परिवार को ही प्रमोट कर रहे हैं”। इसी भाषण के कुछ दिनों बाद उन्होंने राजद (RJD) का साथ छोड़कर फिर से बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया था।
अप्रैल 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक चुनावी सभा में नितीश कुमार ने लालू यादव के बच्चों की संख्या पर कटाक्ष करते हुए कहा, “इतने सारे बच्चे पैदा कर दिए और अब सबको राजनीति में लगा दिया है”। उन्होंने आरोप लगाया कि लालू यादव ने हटने के बाद अपनी पत्नी (राबड़ी देवी) को मुख्यमंत्री बनाया और अब अपने बेटा-बेटी को आगे बढ़ा रहे हैं।
मार्च 2025 में बिहार विधानसभा सत्र के दौरान, तेजस्वी यादव के साथ तीखी बहस के दौरान नितीश कुमार ने कहा, “मैंने ही तुम्हारे पिता (लालू यादव) को नेता बनाया था, लेकिन वे केवल अपने परिवार की चिंता करते रहे”।
सितंबर-नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार के दौरान नितीश कुमार ने लगातार कहा कि “हमारा परिवार पूरा बिहार है, जबकि उनका (लालू का) काम सिर्फ अपने परिवार को पद दिलाना है”।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परिवारवाद (Dynastic Politics) को केवल एक राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि इसे “लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन” और “सामाजिक भ्रष्टाचार का कारण” मानते हैं। और बीजेपी भी लालू यादव पर परिवारवाद का आरोप लगाने में पीछे नही रही।
फरवरी-मई 2025 मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार की रैलियों में लालू यादव के शासन को “जंगलराज” और “परिवारवाद का मॉडल” बताया।
• अमित शाह और जे.पी. नड्डा सहित बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने बार-बार आरोप लगाया है कि लालू यादव चाहते हैं कि उनका बेटा तेजस्वी मुख्यमंत्री बने और सोनिया गांधी चाहती हैं कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनें, जबकि देश की जनता योग्यता चाहती है, विरासत नहीं।
लेकिन यही नितीश कुमार और बीजेपी बिहार में क्या कर रहें हैं-
नीतीश कुमार का एक ही बेटा है, जिसका नाम निशांत कुमार है। वह पेशे से इंजीनियर हैं और अपने पिता की राजनीतिक ज़िंदगी से दूर रहते हैं। निशांत कुमार ने अब तक शादी नहीं की है और लो प्रोफ़ाइल रहना पसंद करते हैं।
8 मार्च को नितीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में संजय झा ने सदस्यता दिलाई, लेकिन इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी नहीं दिखी। इस अवसर पर, ललन सिंह और संजय झा की सक्रियता यह स्पष्ट संकेत दे रही है कि पार्टी में नितीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को एक नई और बड़ी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। संभवत उन्हे सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाया जायेगा।
नीतीश कुमार ने कार्यक्रम मे न पहुंचकर ‘परिवारवाद’ के आरोपों से बचने की कोशिश तो बहुत की। लेकिन विपक्ष की नजरों से नहीं बच पायें। उनकी इस हरकत पर विरोधी दल उन्हे गुड़ खायें और गुलगुला से परहेज करें कहने से बाज नही आ रहें हैं।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भी निशांत कुमार को बधाई दी है। हालांकि बधाई के साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर परिवारवाद को लेकर तंज भी कसा है। रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘चाचा जी… दूसरों पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाली आपकी दलील और थ्योरी अब कहां विलुप्त हो गई?’
उन्होंने आगे लिखा कि आपकी कथनी और करनी में हमेशा बड़ा फर्क रहा है। सच कहूं तो आप राजनीतिक और वैचारिक विरोधाभास की ऐसी पराकाष्ठा रहे हैं, जिस पर यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है-‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे।’
हालांकि अपने संदेश के अंत में रोहिणी आचार्य ने निशांत कुमार को राजनीति में आने पर शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने लिखा कि निशांत का राजनीति में स्वागत है और उम्मीद है कि वे जनसरोकार की राजनीति करेंगे तथा भाजपा के सामने मजबूर और बेबस नजर नहीं आएंगे।
नितीश कुमार की तरह ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परिवारवाद को “लोकतंत्र का सबसे बड़ा दुश्मन” बताते हैं। जहाँ एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व लगातार “परिवारवादी राजनीति” (Parivarvad) पर हमला करते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर कई ऐसे नेता हैं जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं। वर्तमान में मात्र प्रधानमंत्री के पद को छोड़ दें तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक “परिवारवाद” का उदाहरण है।
लेकिन आज हम राष्ट्रीय परिवारवाद नही केवल बिहार मे परिवारवाद की बात कर रहें है-
बिहार मे परिवारवाद का सबसे अच्छा उदाहरण बीजेपी से हैं-
भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का राजनीतिक सफर भी एक मजबूत पारिवारिक पृष्ठभूमि से शुरू हुआ है। वे भाजपा के उन युवा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया है।
नितिन नबीन के पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ और दिग्गज नेता थे। वे पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे और क्षेत्र में उनकी गहरी पकड़ थी। 2006 में पिता के आकस्मिक निधन के बाद, नितिन नबीन का सक्रिय राजनीति में प्रवेश हुआ। भाजपा ने पिता की मृत्यु के बाद होने वाले उपचुनाव में नितिन को टिकट दिया, जिस पर वह पहली बार जीते। वे पटना की बांकीपुर सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं और वर्तमान में वे दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
बिहार मे परिवारवाद का दूसरा उदाहरण भी बीजेपी से हैं-
बीजेपी से ही बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं। सम्राट चौधरी वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री के रूप में गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। और सीएम की दौड़ मे सबसे आगे हैं। सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार के एक कद्दावर नेता रहे हैं। वे खगड़िया से सांसद और तारापुर विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक रह चुके हैं। वे समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और बिहार सरकार में मंत्री के रूप में भी कार्य किया। उनकी माता पार्वती देवी भी सक्रिय राजनीति में रहीं और मुंगेर जिले के तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुनी गई थीं। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी को “परिवारवाद की उपज” बताते हुए कहा है कि वे केवल अपने पिता की विरासत के कारण आज इस मुकाम पर हैं।
बिहार मे परिवारवाद का तीसरा उदाहरण बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा से हैं-
बिहार मे बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा राज्यसभा सांसद हैं। वर्तमान में बिहार की राजनीति में परिवारवाद (Nepotism) के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं। उपेन्द्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को नवंबर 2025 में बिहार की नीतीश कुमार सरकार में कैबिनेट मंत्री (पंचायती राज विभाग) के रूप में शामिल किया गया। एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पृष्ठभूमि वाले दीपक, बिना चुनाव लड़े मंत्री बने, जिससे उनके नाम पर चर्चा और वंशवाद के सवाल उठे। बेटे को मंत्री बनाए जाने के फैसले के खिलाफ उनकी अपनी ही पार्टी के विधायकों ने नाराजगी जताई है। पार्टी के चार में से तीन विधायक ने इस “परिवारवाद” के खिलाफ आवाज उठाई और भाजपा नेतृत्व से भी मुलाकात की। परिवारवाद के आरोपों के कारण पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। वहीं, उपेन्द्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा सासाराम विधानसभा सीट से विधायक हैं। सूत्रों के अनुसार, अब उपेन्द्र कुशवाहा अपनी बहू साक्षी मिश्रा को बिहार सरकार मे बड़ा पद दिलाने की की तैयारी कर रहे हैं।
बिहार मे परिवारवाद का चौथा उदाहरण बीजेपी के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा से हैं-
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम भारतीय राजनीति में “परिवारवाद” की चर्चाओं में प्रमुखता से आता है। वे स्वयं को गर्व से “नेपो किड” (Nepo Kid) कहते हैं, लेकिन इसे एक “दोधारी तलवार” भी बताते हैं। चिराग पासवान भारत के कद्दावर नेता रहे, राम विलास पासवान के पुत्र हैं। स्वर्गीय राम विलास पासवान ने अपने पूरे परिवार को राजनीति में स्थापित किया था। उनके भाई पशुपति कुमार पारस और दिवंगत राम चंद्र पासवान, दोनों सांसद रहे। भतीजा प्रिंस राज (राम चंद्र पासवान के पुत्र), समस्तीपुर से सांसद रहे. चिराग ने स्वीकार किया है कि उन्हें राजनीति में शुरुआती मंच अपने पिता के कारण मिला। उन्होंने स्वयं अपने भांजे सीमांत मृणाल को गरखा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतारा साथ ही उनके जीजा भी सक्रिय राजनीति में हैं।
ये तो रही राजनीति की बात, लेकिन मीडिया ने तो इस खुशी मे कलम ही तोड़ दी है, कल तक लालू यादव के परिवारवाद पर जमकर बरसने वाली मीडिया की नजर में भी बिहार से परिवारवाद का खात्मा हो गया है। देश का एक प्रमुख समाचार पत्र नितीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की उनकी पार्टी जेडीयू की ज्वाईनिंग पर लिख रहा है, जरा शब्दों पर गौर करियेगा।
“बिहार की सियासत में आज एक नया अध्याय जुड़ गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले निशांत कुमार ने औपचारिक रूप से राजनीति का दामन थाम लिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में संजय झा ने उन्हें सदस्यता दिलाई, जिसके बाद निशांत ने पार्टी के कद्दावर नेता ललन सिंह के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा गया, लेकिन चर्चाओं का बाजार तब गर्म हो गया जब इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी नहीं दिखी।“
कितनी सटीक रिपोर्टिंग की है, इस ब्रह्म ज्ञानी रिपोर्टर ने । इसको ये नही पता है कि निशांत कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के पुत्र हैं, ये परिवार वाद है। उसे बस इतना पता है कि नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जातें हैं। करीबी है या नहीं ये भी कंफर्म नही है।
इसीलिये मैं कह रहा हूं कि बिहार से अब परिवारवाद समाप्त हो गया है।





