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ये जालियाँवाला बाग नहीं बल्कि जामियावाला बाग है…

नयी दिल्ली,  नए नागरिकता कानून के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर के बाहर ‘जामियावाला बाग’ शीर्षक के नाटक का मंचन किया गया।

जामिया के छात्रों के एक बयान के अनुसार जामिया हमदर्द के पुराने छात्रों ने 15 दिसंबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा करते हुए नाटक का मंचन किया।

प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान अपनी एक आंख पर पट्टी बांध रखी थी। ऐसा उन्होंने 15 दिसंबर को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान अपनी एक आंख खो चुके छात्र मोहम्मद मिन्हाजुद्दीन के प्रति एकजुटता दर्शाने के लिए किया था।

विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों वाली जामिया समन्वय समिति विश्वविद्यालय के गेट नंबर सात के बाहर विरोध प्रदर्शन का संचालन कर रही थी।

जालियाँवाला बाग हत्याकांड भारत के पंजाब प्रान्त के अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर के निकट जलियाँवाला बाग में १३ अप्रैल १९१९ (बैसाखी के दिन) हुआ था। रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी जिसमें जनरल डायर नामक एक अँग्रेज ऑफिसर ने अकारण उस सभा में उपस्थित भीड़ पर गोलियाँ चलवा दीं जिसमें 400 से अधिक व्यक्ति मरे और २००० से अधिक घायल हुए। अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय में 484 शहीदों की सूची है, जबकि जलियांवाला बाग में कुल 388 शहीदों की सूची है। ब्रिटिश राज के अभिलेख इस घटना में 200 लोगों के घायल होने और 379 लोगों के शहीद होने की बात स्वीकार करते है जिनमें से 337 पुरुष, 41 नाबालिग लड़के और एक 6-सप्ताह का बच्चा था। अनाधिकारिक आँकड़ों के अनुसार 1000 से अधिक लोग मारे गए और 2000 से अधिक घायल हुए।

यदि किसी एक घटना ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम पर सबसे अधिक प्रभाव डाला था तो वह घटना यह जघन्य हत्याकाण्ड ही था। माना जाता है कि यह घटना ही भारत में ब्रिटिश शासन के अंत की शुरुआत बनी।

१९९७ में महारानी एलिज़ाबेथ ने इस स्मारक पर मृतकों को श्रद्धांजलि दी थी। २०१३ में ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरॉन भी इस स्मारक पर आए थे। विजिटर्स बुक में उन्होंनें लिखा कि “ब्रिटिश इतिहास की यह एक शर्मनाक घटना थी।

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