इतिहास रचने वाली नेता — मायावती

15 जनवरी भारतीय राजनीति के इतिहास में एक विशेष दिन है। आज के दिन एक एसे राजनेता का जन्म हुआ हैं, जिसने हाशिये पर खड़े समाज को सत्ता के केंद्र तक पहुँचाया। वह नेता हैं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और दलित-बहुजन समाज की सशक्त आवाज़ — मायावती। मायावती का जीवन शून्य से शिखर तक पहुँचने और कड़े सामाजिक व राजनैतिक संघर्ष की एक अनूठी कहानी है।
मायावती का जन्म 15 जनवरी 1956 को दिल्ली के एक साधारण दलित परिवार में हुआ था। उनके पिता प्रभु दास एक डाक कर्मचारी थे। मायावती ने अपनी पढाई सरकारी स्कूल से शुरू की और अपनी मेहनत से दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. और एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की। बीएड की पढ़ाई के दौरान ही वह समाज सुधारक कांशीराम साहब के संपर्क में आईं। यहीं से उनके जीवन की दिशा बदल गई। राजनीति में आने से पहले मायावती दिल्ली के एक स्कूल में शिक्षिका थीं और IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) अधिकारी बनने की तैयारी कर रही थीं। 1977 में दलित नेता कांशीराम से उनकी मुलाकात ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। कांशीराम ने उनसे कहा था, “मैं तुम्हें इतना बड़ा नेता बनाऊंगा कि एक नहीं, दर्जनों IAS अधिकारी तुम्हारे आगे-पीछे फाइलें लेकर घूमेंगे”। इसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। कांशीराम जी के नेतृत्व में उन्होंने बहुजन आंदोलन को न केवल समझा, बल्कि उसे ज़मीनी स्तर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वैसे, मायावती का राजनैतिक सफर आसान नहीं था। वे 1984, 1985 और 1987 में अपने शुरुआती तीन चुनाव हार गईं। उन्होंने पहली जीत 1989 में बिजनौर लोकसभा सीट से हासिल की। 1995 में वे उत्तर प्रदेश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं, जो भारतीय राजनीति में एक मील का पत्थर था।
मायावती इतिहास रचने वाली नेता हैं। वह उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं हैं। वे देश की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव भी रखती हैं। उनके कार्यकाल में कानून व्यवस्था को प्राथमिकता, सामाजिक न्याय की नीति, दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों को प्रशासन में सम्मान जैसे अहम कदम उठाए गए। उनके शासन में डॉ. भीमराव अंबेडकर, कांशीराम और सामाजिक महापुरुषों के स्मारकों का निर्माण केवल स्थापत्य नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक बना। देश में मायावती बहुजन स्वाभिमान की आवाज़ बनी।
मायावती ने राजनीति में नारे नहीं, हाशिये पर खड़े समाज को आत्मसम्मान दिया। उन्होंने यह साबित किया कि बहुजन समाज केवल वोट बैंक नहीं, बल्कि सत्ता का निर्णायक केंद्र भी हो सकता है। उनकी स्पष्टवादिता, अनुशासन और सख़्त प्रशासनिक शैली उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान देती है। विशेष रूप से कानून-व्यवस्था के मामले में, उन्हें एक सख्त प्रशासक के रूप में जाना जाता है।
15 जनवरी केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि सामाजिक समानता, राजनीतिक चेतना और बहुजन स्वाभिमान के संकल्प को दोहराने का दिन है। आज भी मायावती जी लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो संघर्ष से आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहते हैं।





