भीमा कोरोगांव हिंसा मामले में नया खुलासा, साजिश की सरकारी कहानी पर बड़ा सवाल

मुंंबई, महाराष्ट्र के पुणे में भीमा कोरोगांव हिंसा और अर्बन नक्सल मामले में नया खुलासा हुआ है. भीमा कोरोगांव में 2018 में हुई हिंसा के सिलसिले में हुई जाँच और गिरफ़्तारियों पर एक नई रिपोर्ट के आने के बाद मीडिया में सुर्खियों में है.

आरोपियों के वकील ने दावा किया है कि आरोपियों में से एक रोना विल्सन के लैपटॉप से बरामद साजिश के मेल खुद उन्होंने नहीं लिखे थे बल्कि इन्‍हें प्लांट करवाया गया था. बचाव पक्ष के वकील मिहिर देसाई के मुताबिक, पुणे कोर्ट के आदेश पर मिले हार्ड डिस्क के क्लोन को अमेरिका के अर्सनाल डिजिटल फोरेंसिक लैब भेजा गया था जिसकी रिपोर्ट से ये खुलासा हुआ है.

आर्सेनल रिपोर्ट में एक अहम बात ये भी है कि रोना विल्सन के कंप्यूटर में Microsoft Word  2007 था. लेकिन कथित तौर पर उनके द्वारा लिखे गए कुछ दस्तावेज़ MS 2010 और MS 2013 तक के PDF फॉर्मेट में थे.

किसी भी कंप्यूटर में हायर वर्जन का डॉक्यूमेंट लोअर वर्जन में क्रिएट कर सकते हैं, लेकिन लोअर वर्जन के कंप्यूटर में में हायर वर्जन का डॉक्यूमेंट क्रिएट नही कर सकते हैं. इससे स्पष्ट है कि रोना विल्सन के कंप्यूटर में वो लेटर ड्राफ्ट नही हुए हैं? वे प्लांट किये गए थे.  इस खुलासे से बचाव पक्ष के हाथ बड़ा ‘तुरुप का पत्ता’ लगा है. इसलिए अब  उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अर्जी देकर मामला खारिज करने की मांग की है.

उधर नेशनल इनवेस्‍टीगेशन एजेंसी  ने प्रेस नोट जारी कर दस्तावेज प्लांट करने की बात से इनकार करते हुए कहा है कि रोना विल्सन के यहां सारी जप्ती नियमों के तहत की गई है और पुणे एफएसएल की रिपोर्ट में छेड़छाड़ की बात नहीं आई है.

पुणे में हुई हिंसा के मामले में कई वामपंथी कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ़्तार किया गया है. भीमा कोरेगांव में अंग्रेज़ों की महार रेजीमेंट और पेशवा की सेना के बीच हुई लड़ाई में महार रेजीमेंट की जीत हुई थी. दलित बहुल सेना की जीत की 200वीं वर्षगांठ के मौक़े पर हिंसा की घटना हुई थी.

 भीमा कोरोगांव में हुई जाँच और गिरफ़्तारियों पर एक नई रिपोर्ट के आने के बाद अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियों में है. अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने अमेरिका की एक साइबर फ़ोरेंसिक लैब की जाँच रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि इस मामले में गिरफ़्तार किए गए कम-से-कम एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ सबूत प्लांट किए गए थे.

 महाराष्ट्र के तत्‍कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया था.अब सवाल है अमेरिकी फोरेंसिक लैब की इस रिपोर्ट को कानूनी वैधता मिलती है या नही लेकिन इतना तो जरूर है कि साजिश की सरकारी कहानी पर बड़ा सवाल  खड़ा हो गया है.

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