आईपीएस अरविंद सेन यादव की जमानत पर, हाईकोर्ट ने लिया ये निर्णय

लखनऊ ,  इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ ने प्रदेश के पशुपालन विभाग में करोड़ों रुपए के टेंडर घोटाले में फंसे निलंबित डीआईजी अरविंद सेन की अग्रिम जमानत मामले में बुधवार को सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया है ।
गिरफ्तारी से बचने के लिए निलंबित डीआईजी फरार चल रहा हैं। उन्होने वकील के जरिये अग्रिम जमानत की अर्जी पेश कर माँग की है। न्यायामूर्ति आलोक माथुर के समक्ष सेन की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई भी हुई। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही का कहना था कि सेन के खिलाफ इस मामले में पर्याप्त सबूत मिले हैं और करीब 10 लाख रुपये खाते में लेने का खुलासा हुआ है। ऐसे में एक वरिष्ठ पुलिस अफसर होने के नाते उसके खिलाफ अपराध की गम्भीरता और बढ़ जाती है। लिहाजा वह अग्रिम जमानत का पात्र नहीं है और अर्जी खारिज किए जाने लायक है।
उधर, सेन के अधिवक्ता का कहना था कि महज राजनीतिक रंजिश के चलते आरोपी को इस मामले में फंसाया गया है और वह अग्रिम जमानत का पात्र है।
अभियोजन के मुताबिक़ टेंडर घोटाले का खुलासा बीते जून महीने में हुआ था। 13 जून को इंदौर के व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया उर्फ रिंकू ने लखनऊ के थाना हजरतगंज में एफआईआर की थी। इस मामले में 10 अभियुक्तों को नामजद किया गया था। अभियुक्तों पर कूटरचित दस्तावजों व छद्म नाम से गेहूं, आटा, शक्कर व दाल आदि की सप्लाई का ठेका दिलवाने के नाम पर 9 करोड़ 72 लाख 12 हजार रुपए की ठगी करने का आरोप है।
अरविंद सेन पर आरोप है कि उन्होंने सीबीसीआईडी में बतौर एसपी रहते हुए पीड़ित को डराया, धमकाया और सादे पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बदले कथित ठगों ने उन्हें मोटी रकम दी। मामले की जांच हुई तो आरोप सही पाए गए। जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था। अब पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए उन्हें तलाश कर रही है।

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