सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने गॉधी जयंती के अवसर पर लिया ये बड़ा संकल्प

लखनऊ, बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने गॉधी जयंती के अवसर समाज में विभाजन और नफ़रत फैलाने वाली शक्तियों के खिलाफ लोगों को एकजुट कर संघर्ष का संकल्प लिया. वक्ताओं में कहा कि आज पूंजीवाद के हावी होने बेरोजगारी और असमानता बढ़ रही है . इस सबसे लड़ने के लिए महात्मा गॉधी का रास्ता ही कारगर है.
मोती महल सभागार में आयोजित इस सभा को संबोधित करते हुए प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने कहा कि अन्याय के विरुद्ध के विरुद्ध सशक्त आवाज थे महात्मा गांधी . पहले के गांधी एवं बाद के गांधी में बहुत परिवर्तन है परंतु हमें बाद के गांधी को समझना और उसी के अनुरूप चलना पड़ेगा .
शहर में प्रबुद्ध वर्ग से भरे सभागार में प्रोफेसर रमेश दीक्षित ने गांधी जी के जीवन मूल्यों का पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि दुनिया में जहां भी अत्याचार हुआ उसका उन्होंने स्पष्टता के साथ मुखर विरोध किया .
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा ने कहा गांधी जी निडरता के प्रतीक हैं . उनके दृढ़ संकल्प को सराहते हुए कहां कि वह प्रत्येक युग में मानवता के लिए याद किए जाते रहेंगे . साथ ही हमें अन्याय से लड़ने की ताकत भी देते रहेंगे . उन्होंने कहा गांधी जी के विचारों को लेकर हमें दरवाजे – दरवाजे जाना होगा . लोगों के दुख दर्द में शामिल होना होगा .
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर नदीम हसनैन ने कहा कि समाज आज इंसानियत के उन मापदंडों पर खरा नहीं उतर रहा है जिसे समाज में अमन का वातावरण बन सके उन्होंने कहा गांधी जी ने समाज के उसे अंतिम व्यक्ति की पीड़ा से चिंतित होकर उसके लिए काम किया परंतु आज दुनिया में युद्ध एवं अशांति का वातावरण व्याप्त है यदि वह होते तो बिना बोले रह नहीं सकते थे .
प्रोफेसर रविकांत ने कहा की गांधी जी के विचार भिन्नता के बावजूद वह किसी से दुश्मनी नहीं रखते थे . वर्तमान अंबेडकरवादी एक बड़ी लकीर को छोटी लकीर में तब्दील कर देना चाहते हैं उन्हें समझना होगा की गांधी जी प्रारंभ से ही जिस समाज की चिंता कर रहे थे वह समाज कौन है . इसीलिए उन्होंने उसे समाज को सर्वग्राही बनाने के उद्देश्य से डॉक्टर अंबेडकर को संविधान सभा की प्रारूप समिति का अध्यक्ष बनवाया जिसकी वजह से आज समाज को बहुत कुछ मिल सका है .
इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित करते हुए गांधीवादी विचारक रामदत्त त्रिपाठी ने कहा कि गांधीजी आज देश के लिए ही नहीं पूरी दुनिया के लिए मार्ग दर्शक के रूप में है उनके विचार आज भी दुनिया देश को सही मार्ग दिखाने के लिए उपयोगी हैं किंतु क्या कहा जाए जैसी हवा चल रही है उस हवा में बहुत कुछ आवश्यक है कि एक साथ चलकर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाया जाए .
संगोष्ठी को संबोधित करने वालों में सर्वश्री राकेश वेदा , वंदना मिश्र , हरि चरण प्रकाश वीरेंद्र कुमार सिंह , अतहर हुसैन , अनिल त्रिपाठी कला निधि मिश्रा आदि प्रमुख थे .
इस अवसर पर सर्व श्री देवेंद्र वर्मा अमिताभ सुभाष बाजपेई , डॉक्टर रामचंद्र सरस , अरविंद राज स्वरूप , परमानंद , निशात फातिमा , अवंतिका सिंह , कुंमार भवेश चंद्र , अनुराग , डॉक्टर रवीश कुमार , अशोक कुमार , भगवान स्वरूप कटियार , अनमोल मौर्य , अक्षिका सिंह , संजीव सिंह , हरिचरण प्रकाश , राकेश कुमार ओझा , डॉक्टर कृष्णकांत यादव , उबेद नासिर मोहम्मद अब्दुल , ओंकार सिंह , सुरेंद्र अग्निहोत्री , आशीष कुमार , हाफिज किदवई , बदरे आलम , रिजवान , वीरेंद्र त्रिपाठी एडवोकेट , दिलीप मिश्र एडवोकेट, नायर उमर , राजेंद्र सिंह रावत , घनश्याम सिंह , सईद अहमद , रामवती , साइमा खान , डॉक्टर मनोज पांडे , डॉक्टर राकेश पांडे , असगर मेहंदी , फिदा हुसैन अंसारी , अमित कुमार राय , वीरेंद्र मिश्र , शैलेंद्र श्रीवास्तव , सुनील कुमार सिंह , आशीष जैन , सुशील सिंह , अशफाक अहमद , फखरुल हसन , सलीम काकोरी , प्रशांत त्रिपाठी , जुबेर आज़मी सहित अन्य तमाम लोग उपस्थित रहे .
ज्ञातव्य रहे कार्यक्रम आरपी ट्रस्ट फॉर पीस प्रास्पैरिटी एंड जस्टिस के तत्वावधान में संपन्न हुआ.





