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आज़ादी की महानायिका, वीरांगना झलकारी बाई कोरी

लखनऊ, आज आज़ादी की महानायिका एवं वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की प्रिय सहेली झलकारी बाई का 189 वां

जन्मदिन है ।

झलकारी बाई का जन्म 22 नवम्बर, 1830 को ग्राम भोजला जिला झांसी उत्तर प्रदेश में हुआ था।

उनके पिता मूलचन्द्र सेना में काम करते थे। इस कारण घर के वातावरण में शौर्य और देशभक्ति की भावना का प्रभाव था।

घर में प्रायः सेना द्वारा लड़े गये युद्ध, सैन्य व्यूह और विजयों की चर्चा होती थी।

मूलचन्द्र जी ने बचपन से ही झलकारी को अस्त्र.शस्त्रों का संचालन सिखाया।

इसके साथ ही पेड़ों पर चढ़ने, तैरने और ऊँचाई से छलांग लगाने जैसे कार्यों में भी झलकारी पारंगत हो गयी।

एक बार झलकारी बाई जंगल से लकड़ी काट कर ला रही थी, तो उसका सामना एक खूँखार चीते से हो गया।

झलकारी ने कटार के एक वार से चीते का काम तमाम कर दिया और उसकी लाश कन्धे पर लादकर ले आयी।

जब झलकारी युवा हुई, तो उसका विवाह झाँसी की सेना में तोपची पूरन कोरी से हुआ।

जब झलकारी रानी लक्ष्मीबाई से आशीर्वाद लेने गयी, तो उन्होंने उसके शस्त्राभ्यास को देखकर उसे दुर्गा दल में भर्ती कर लिया।

जब 1857 में अंग्रेजी सेना झांसी पर अधिकार करने के लिए किले में घुसने का प्रयास कर रही थी,

तो झलकारी बाई शीघ्रता से रानी के महल में पहुँची और उन्हें दत्तक पुत्र सहित सुरक्षित किले से बाहर जाने में सहायता दी।

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