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कोरोना विसंक्रमण मे, केमिकल के सीधे मनुष्यों पर इस्तेमाल में बरतें सतर्कता

नयी दिल्ली , कोविड-19 के खिलाफ जंग में  डिसइंफेक्शन वाले रसायनों को सीधे मनुष्यों पर इस्तेमाल में सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया है।

लोगों पर सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन एवं हाइड्रोजन परऑक्साइड जैसे रसायनों के छिड़काव के मामलों को देखते हुए एएमएआई ने यह बयान जारी किया है।

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एएमएआई भारत में संपूर्ण एल्कली उद्योग का प्रतिनिधि संगठन है। यह उद्योग सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन, ब्लीचिंग सॉल्यूशन/पावडर आदि का उत्पादन करता है, जिनका इस्तेमाल डिसइंफेक्शन में किया जाता है।

उसने कहा कि हाइपोक्लोराइट एक बहुत शक्तिशाली डिसइंफेक्टेंट है। किसी संक्रमित सतह या वस्तु को डिसइंफेक्ट करने के लिए निर्धारित डाइल्यूशन में ही इसका इस्तेमाल किया जाता है। त्वचा पर इसके लगने से जलन और खुजली हो सकती है और त्वचा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

इसी तरह हाइड्रोजन परऑक्साइड एक शक्तिशाली ब्लीचिंग एजेंट है और इसका इस्तेमाल भी सिर्फ किसी सतह या स्थान पर ही किया जाना चाहिए। चेहरे पर इनका इस्तेमाल और भी खतरनाक है, क्योंकि आंख, नाक या मुंह में इन रसायनों के जाने से सेहत से जुड़ी गंभीर समस्या पैदा हो सकती है।

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एएमएआई ने कहा कि मीडिया में हाल में ऐसी कुछ रिपोर्ट आई हैं कि सोडियम हाइपोक्लोराइट सॉल्यूशन और हाइड्रोजन परऑक्साइड का इस्तेमाल लोगों को डिसइंफेक्ट करने में किया गया। इतना ही नहीं ऐसे कुछ स्पेशल चैंबर भी देखने को मिले हैं, जिसमें आने जाने वालों पर डिसइंफेक्टेंट रसायन का स्प्रे किया जाता है। हम सरकार और नगर प्रशासनों के साथ मिलकर इस रसायनों के सुरक्षित इस्तेमाल पर बात कर रहे हैं।’

एएमएआई ने कहा कि इस चुनौतीपूर्ण समय में एएमएआई के सदस्यों ने कोविड-19 महामारी से लड़ाई में सरकार के प्रयासों को समर्थन देते हुए डिसइंफेक्शन रसायनों की आपूर्ति को पर्याप्त बनाए रखने के लिए अहम कदम उठाए हैं। सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन, हाइड्रोजन परऑक्साइड और ब्लीच सॉल्यूशन जैसे रसायनों का बहुत सतर्कता से प्रयोग होना चाहिए और त्वचा पर इन्हें लगने से बचाना चाहिए। अगर त्वचा पर ऐसे रसायन लग जाएं तो तुरंत पानी से अच्छी तरह साफ करना चाहिए।

एएमएआई का कहना है कि हाथों को डिसइंफेक्ट करने या साफ करने के लिए एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का इस्तेमाल होना चाहिए। इसके अलावा शरीर का कोई भी हिस्सा केवल सामान्य साबुन एवं पानी से ही साफ करना चाहिए।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का भी कहना है कि सोडियम हाइपोक्लोराइट, क्लोरीन व ब्लीच सॉल्यूशन जैसे डिसइंफेक्शन रसायनों को इस्तेमाल किसी सतह या वस्तुओ को डिसइंफेक्ट करने में ही होना चाहिए। व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए डब्ल्यूएचओ का भी कहना है कि साबुन और पानी का प्रयोग करना चाहिए।

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, डिसइंफेक्टेंट सतह पर कारगर हैं, मानव शरीर पर नहीं, बल्कि शरीर पर इस्तेमाल से ये नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। एल्कोहल या क्लोरीन का स्प्रे म्यूकस मेंब्रेन जैसे आंखों, मुंह आदि के लिए घातक हो सकता है।

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