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अल्पसंख्यकों की लड़ाई मुलायम सिंह यादव ने हमेशा लड़ी है- शिवपाल सिंह

shivpalलखनऊ,  समाजवादी के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से अल्पसंख्यकों के शिष्टमंडल ने मिलकर समाजवादी पार्टी में अपना विश्वास जताया। आल इंडिया मुस्लिम वारसी समाज के अध्यक्ष हाजी सैयद वासिक वारसी ने हजरत हाजी वारिस अली ’देवा शरीफ’ की चादर शिवपाल सिंह यादव को भेंट की।

इस अवसर पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि अल्पसंख्यक की लड़ाई समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष नेताजी मुलायम सिंह यादव ने हमेशा लड़ी है। समाजवादी पार्टी की सरकारों ने अल्पसंख्यकों को विशेष अवसर देकर मुख्यधारा में जो सम्मान दिलाया है, वो किसी ने नहीं किया। समाजवादी पार्टी ने किसानों मुसलमानों व शिक्षकों के हित व सम्मान से कभी समझौता नहीं किया। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती लगातार मुसलमानों को बरगला रही हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की मदद से तीन बार सरकार बनाया और उत्तर प्रदेश में आरएसएस का एजेण्ड़ा लागू किया। सुश्री मायावती को सार्वजनिक मंचों से तथ्यों से परे झूठ बोलने में महारत हासिल है। उनके शासन काल में अल्पसंख्यकों का अनवरत शोषण हुआ। बसपा राज्य में मुसलमानों को थानों और कचहरियों में अपमानित किया जाता रहा, लेकिन बसपा प्रमुख ने कार्यवाही करना तो दूर, कभी एक शब्द भी नहीं बोला। बसपा द्वारा अल्पसंख्यकों पर जारी किया हुआ बुकलेट झूठ का पुलिन्दा है।

श्री यादव ने कहा कि बसपा प्रमुख को इतिहास की जानकारी नहीं है। बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर को ’भारत-रत्न’ जनता दल की सरकार के कार्यकाल के दौरान घोषित किया गया था, जिसके शीर्षक्रम के नेताओं में मुलायम सिंह जी मुख्य थे। बाबा साहब को ’भारत-रत्न’ दिलाने में जार्ज फर्नाण्डीज, मधु दण्ड़वते, विश्वनाथ प्रताप सिंह एवं नेताजी की खुली पैरवी थी। बाबा साहब के नाम पर देश में पहली योजना अम्बेडकर ग्राम विकास योजना नेताजी ने ही लागू किया था। जिसमें आस्था होती है, उसके नाम पर कभी झूठ नहीं बोला जाता। मायावती जी लगातार मुसलमानों और बाबा साहब को लेकर झूठ बोल रही हैं।

शिवपाल सिंह यादव ने बरेली रैली की ऐतिहासिक सफलता और उमड़े जनसैलाब का श्रेय कार्यकर्ताओं को देते हुए कहा कि कार्यकर्ता समाजवादी पार्टी की रीढ़ व आत्मा हैं। गाजीपुर के बाद बरेली रैली ने सिद्ध कर दिया कि जनता साम्प्रदायिकता के खिलाफ और समाजवादी पार्टी के पक्ष में है। शिष्टमंडल में वकास वारसी, महफूज खान, शाहिद खान, मौलाना बहरूल, मौलाना इश्तियाक, मौलाना नजर अब्बास, मौलाना जुबैर अली, हाजी फजल महमूद समेत कई लोग शामिल थे।

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