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चीन-भारत सीमा मुद्दे पर बनी सहमति का ईमानदारी से सम्मान होना चाहिए

 

 

नई दिल्ली, भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह महत्वपूर्ण है कि सीमा मुद्दे के समाधान के लिए चीन-भारत के विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति का दोनों पक्षों द्वारा ईमानदारी से सम्मान किया जाए तथा प्रत्येक पक्ष दूसरे की स्थिति सही रूप में रखे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार की यह प्रतिक्रिया चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के उस कथित बयान के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में आयी जिसमें दावा किया गया था कि चीन-भारत सीमा के सिक्किम सेक्शन का सीमांकन 1890 की ब्रिटेन-चीन संधि के तहत हुआ है।

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 चीन की ओर से यह दावा गत रविवार को किया गया था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के नाथूला चौकी की पहली यात्रा के एक दिन बाद। कुमार ने कहा, हमने-खबरें और टिप्पणियां देखी हैं। भारत-चीन सीमा मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर, दोनों के बीच समय समय पर हुए समझौतों और सहमतियों के आधार पर होती है।

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 उन्होंने कहा, विशेष प्रतिनिधियों के बीच सबसे हालिया साझा सहमति 2012 में बनी थी। यह महत्वपूर्ण है कि इन सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा ईमानदारी से सम्मान किया जाए और प्रत्येक पक्ष दूसरे की स्थिति सही रूप में रखे। इन खबरों पर कि चीन ने डोकलाम में गतिरोध वाले स्थल के पास अपने सैनिकों की अच्छी संख्या बनाये रखी है और पहले से मौजूद एक सड़क को चौड़ा करने का काम शुरू कर दिया है जो कि गतिरोध वाले क्षेत्र से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है, कुमार ने कहा कि 28 अगस्त को वापसी के बाद से भारत-चीन सैन्य आमना-सामना वाले स्थल पर कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।

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 उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में यथास्थिति बरकरार है। इसके विपरीत किया जाने वाला कोई भी दावा गलत है। विदेश सचिव एस जयशंकर की इस सप्ताह सेशेल्स यात्रा के बारे में एक अन्य सवाल पर प्रवक्ता ने कहा कि वह एक पूर्व निर्धारित यात्रा थी। कुमार ने कहा, उन्होंने राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, विपक्ष के नेता और कैबिनेट मंत्रियों से मुलाकात की। मुख्य ध्यान द्विपक्षीय सहयोग के विकास और समुद्री सहयोग पर था।

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