अखिलेश यादव ने यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया स्वागत

ग्रेटर नोएडा, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव गुरुवार को उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्धनगर जिला परिक्षेत्र ग्रेटर नोएडा के धूम मानिकपुर गांव में पार्टी नेता मोहित नागर के आवास पर उनके पारिवारिक कार्यक्रम में पहुंचे जहां उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया।
श्री यादव ने कहा कि न्याय व्यवस्था का मूल उद्देश्य यह होना चाहिए कि दोषी बचें नहीं और निर्दोष के साथ अन्याय न हो। उन्होंने सवाल उठाया कि इससे पहले वर्ष 2012 में भी ऐसे रेगुलेशन लाए गए थे लेकिन उनसे क्या सीखा गया, उन नियमों के दौरान विश्वविद्यालयों और संस्थानों का व्यवहार कैसा रहा, और उनके कार्यशैली में क्या खामियां थीं इन सवालों का जवाब देना जरूरी है।
यूजीसी के नए ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ को लेकर उपजे विवाद पर शीर्ष अदालत द्वारा रोक लगाए जाने के बाद सियासी प्रतिक्रियाएं आने लगी। जिसमें सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं होता। कानून की भाषा और नीयत दोनों साफ होनी चाहिए, ताकि किसी का उत्पीड़न न हो।”
अखिलेश यादव ने कहा कि संविधान स्पष्ट रूप से भेदभाव के खिलाफ है, इसके बावजूद समय-समय पर अन्याय और भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं, जिसके चलते सड़कों पर आंदोलन होते रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान और कानूनों की भावना के अनुरूप ही किसी भी नए नियम या रेगुलेशन को लागू किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि यूजीसी के ‘इक्विटी रेगुलेशन 2026’ को लेकर छात्र, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान पहले से ही दो मतों में बंटे हुए थे। जहां कुछ वर्ग इसे संस्थागत भेदभाव समाप्त करने की दिशा में अहम कदम बता रहे थे, वहीं विरोध करने वालों का कहना था कि यह समाज को बांटने वाला और भ्रम पैदा करने वाला प्रावधान है। उच्चतम न्यायालय द्वारा फिलहाल इस पर रोक लगाए जाने से यह बहस और तेज हो गई है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है और सरकार और यूजीसी इसमें क्या संशोधन करते हैं।




