बीएचयू के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, 1.2 किलो और 29 में जन्म मासूम को मिला नया जीवन

वाराणसी,  बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान केहृदयरोग विभाग ने चिकित्सा जगत में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यहाँ के डॉक्टरों ने मात्र 1.2 किलोग्राम वजन के एक नवजात शिशु का सफल ‘पिकोलो डिवाइस क्लोजर’ किया है।
विशेष बात यह है कि उत्तर प्रदेश में यह पहली बार है जब यह जटिल प्रक्रिया बिना किसी बाहरी विशेषज्ञ की मदद के पूरी तरह संस्थान की टीम द्वारा संपन्न की गई।

इस जटिल कार्य को सफल बनाने में मुख्य रूप से हृदयरोग विभाग से डॉ. प्रतिभा राय (मुख्य नेतृत्व), विभागाध्यक्ष डॉ. विकास, डॉ. प्रताप और डॉ. नितेश, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. प्रतिमा, डॉ. संजीव और डॉ. अमृता, बाल रोग विभाग एवं अन्य से डॉ. अनु, डॉ. स्वाति, डॉ. केशवन, डॉ. सोम और डॉ. सिद्धार्थ लखोटिया (सीटीवीएस) से का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो एस एन शंखवार और हृदयरोग विभाग ने इस सफलता को चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। इस सफल उपचार के बाद अब उस नन्हे शिशु को वेंटिलेटर से मुक्ति मिलने की उम्मीद जगी है।

महज 29 सप्ताह में जन्मा एक प्रीटर्म शिशु (समय से पहले जन्मा) जिसका वजन मात्र 1.2 किलो था और वह पिछले 30 दिनों से वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहा था। शिशु के दिल की नस खुली हुई थी (जिसे पीडीए कहा जाता है), जिसे बंद करना अनिवार्य था।

डॉक्टरों ने पिकोलो डिवाइस तकनीक का इस्तेमाल किया। यह एक ‘कैथेटर’ आधारित प्रक्रिया है, जिसमें बिना किसी बड़े चीरे या ओपन हार्ट सर्जरी के दिल के छेद को बंद कर दिया जाता है। डॉ. सिद्धार्थ लखोटिया के अनुसार, यह तकनीक भविष्य की चिकित्सा है क्योंकि इसमें सर्जरी का जोखिम और शरीर पर कोई निशान नहीं रहता।

डॉ. प्रतिभा राय और डॉ. अनु ने साझा किया कि इतने कम वजन वाले बच्चों के मामले में समय पर रेफरल बहुत जरूरी है। उन्होंने अपील की है कि ऐसे मामलों को समय रहते बीएचयू रेफर करें ताकि सटीक योजना और टीमवर्क से बच्चे की जान बचाई जा सके। हृदयरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विकास ने बताया कि इससे पहले प्रदेश के अन्य केंद्रों पर ऐसी प्रक्रियाएं बाहरी विशेषज्ञों की देखरेख में हुई थीं। लेकिन बीएचयू की टीम ने इसे पूरी तरह अपने दम पर सफल बनाया, जो संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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