बीसीसीआई ने नेत्रहीन क्रिकेटरों के लिए खोले सहयोग के द्वार

मुम्बई, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शनिवार को भारतीय क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (सीएबीआई) के लिए सहयोग की घोषणा की है।

बीसीसीआई की इस पहल के तहत अब पुरुष और महिला दोनों टीमों को प्रत्येक वर्ष दो विदेशी टूर्नामेंट के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा का प्रबंध, भारत में होने वाली द्विपक्षीय सीरीज के दौरान घरेलू और मेहमान टीमों के रहने की जगह का इंतजाम तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के लिए बीसीसीआई से जुड़े स्टेडियम और मैदान तक एक्सेस, जिससे उच्च स्तरीय खेलने के हालात और प्रोफेशनल मैच का माहौल पक्का, का प्रबंध करेगा।

इस अवसर पर बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास ने कहा, “भारत के नेत्रहीन क्रिकेटरों की कामयाबी क्रिकेट जगत के लिए बहुत गर्व की बात है। इस सपोर्ट फ्रेमवर्क के जरिए बीसीसीआई का उद्देश्य इन एथलीटों के लिए मौके, ढांचा और एक्सपोजर को मजबूत करना है। खेल के लिए हमारे विजन में सबको साथ लेकर चलना सबसे जरूरी है। हमें उम्मीद है कि यह सहयोग टीमों को आत्मविश्वास के साथ बेहतरीन काम करने और कई और लोगों को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।”

बीसीसीआई के महासचिव देवजीत सैकिया ने कहा, “बीसीसीआई उन कोशिशों को सपोर्ट करने के लिए प्रतिबंद्ध है जिनसे खेल तक पहुंच बढ़े। सीएबीआई को यह समर्थन देना यह सुनश्चित करने में एक जरूरी कदम है कि देखने में दिक्कत वाले क्रिकेटरों को देश और विदेश दोनों जगह आत्मविश्वास के साथ मुकाबला करने के लिए जरूरी सुविधाएं और मदद मिले। बीसीसीआई के सहयोग वाले ढांचे और मैच के माहौल से फायदा उठाने का मौका उनके अनुभव को और बेहतर बनाएगा और भारत में नेत्रहीन क्रिकेट में प्रोफेशनल स्टैंडर्ड को बढ़ाने में मदद करेगा।”

उल्लेखनीय है कि भारत के नेत्रहीन क्रिकेटरों ने पिछले एक दशक में ग्लोबल स्टेज पर शानदार सफलता हासिल की है, जिसमें कई पुरुष विश्वकप खिताब में से एक ऐतिहासिक पहला महिला विश्वकप जीतना शामिल है। इन उपलब्धियों और नेत्रहीन क्रिकेटरों के सामने आने वाली चुनौतियों को पहचानते हुए बीसीसी ने पुरुष और महिला दोनों राष्ट्रीय टीमों को सपोर्ट देने का वादा किया है।यह पहल क्रिकेट में सबको साथ लेकर चलने की अहमियत को दिखाती है।

वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) चेयरमैन जय शाह ने बीसीसीआई महासचिव के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान इसकी वकालत की थी और आईसीसी में अपनी भूमिका में इसका सपोर्ट करना जारी रखा है।

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