मंच ही मेरी साधना का स्थल: अनुपम खेर

वाराणसी,  पद्मभूषण से सम्मानित अभिनेता अनुपम खेर ने शुक्रवार को कहा कि वह बचपन से ही हनुमान भक्त है आर उनकी साधना का स्थल थियेटर रहा है।

बनारस लिटरेचर फेस्टिवल–4 के उद्घाटन अवसर पर उन्होने कहा, “मैं तो बचपन से ही हनुमान जी का भक्त हूं और मंच ही मेरी साधना का स्थान रहा है।” नदेसर स्थित होटल ताज में दीप प्रज्ज्वलित कर उन्होंने महोत्सव का शुभारंभ किया। काशी की सांस्कृतिक धरती पर आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, कला और सृजन का उत्सवपूर्ण वातावरण देखने को मिला।

उद्घाटन सत्र में स्कूली बच्चों की नाट्य प्रस्तुति से भावुक हुए अनुपम खेर ने अपने स्कूल के दिनों का संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि अपने पहले नाटक में वे पृथ्वीराज चौहान बने थे और एक हास्यप्रद घटना के चलते मंचन ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया था। उनका यह किस्सा सुनकर सभागार ठहाकों से गूंज उठा।

बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी कलाकार की असली पूंजी प्रतिभा नहीं, बल्कि कठोर परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास है। अभिनय को उन्होंने जीवन को गहराई से देखने और महसूस करने की साधना बताया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।

फेस्टिवल के अध्यक्ष दीपक मधोक ने कहा कि काशी से बेहतर आयोजन स्थल और कोई नहीं हो सकता, जहां धर्म, आध्यात्म और संस्कृति का सतत प्रवाह है। सचिव बृजेश सिंह ने बताया कि इस वर्ष 167 विशिष्ट हस्तियां भाग ले रही हैं और 13 देशों की प्रस्तुतियां आयोजित हो रही हैं। 1 फरवरी तक चलने वाले इस महोत्सव में लगभग एक लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान है।

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