मंत्री ने बताई कुत्ते के काटने पर शुरुआती समय की अहमियत, डॉग लवर्स पर फूटा विधायकों का गुस्सा

भोपाल, मध्यप्रदेश विधानसभा में आज आवारा श्वानों के लोगों पर बढ़ते हमले जैसे सीधे-सीधे जनता से जुड़े हुए मुद्दे को लेकर लगभग पौने घंटे तक चली सार्थक बहस के बाद जहां एक ओर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने ऐसे मामलों में शुरुआती समय की जागरुकता की अहमियत बताई, वहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत कई विधायकों ने डॉग लवर्स के व्यवहार को लेकर भी सवाल खड़े किए।

कांग्रेस विधायक आतिफ अकील और राजन मंडलाेई ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से आवारा श्वानों के बढ़ते आतंक, कथित तौर पर कुछ बच्चों की श्वानों के हमले में मौत और एंटी रेबीज इंजेक्शन के कथित तौर पर नाअसर साबित होने की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इस पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री विजयवर्गीय और स्वास्थ्य मंत्री श्री शुक्ल, दोनों ने सरकार की ओर से उत्तर दिया।

मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि सभी नगरीय निकायों और नगर पालिकाओं को श्वान नसबंदी केंद्रों की संख्या बढ़ाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि श्वानों की नसबंदी के मामले में उच्चतम न्यायालय की ओर से भी दिशानिर्देश आए हैं। जिनके अनुपालन के लिए विशेषज्ञता वाले लोगों की आवश्यकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे विशेषज्ञों की कमी है, लेकिन राज्य सरकार प्रयास करेगी कि बाहर के विशेषज्ञों को बुला कर भी श्वानों की नसबंदी की व्यवस्था कराई जा सके।

श्री विजयवर्गीय ने इस मुद्दे को भारतीय संस्कृति से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि हमारे परिवारों में ‘पहली रोटी गाय की, अंतिम कुत्ते की और बंटा आटा चींटियों’ को देने की व्यवस्था थी। दुर्भाग्य से अब ये परिदृष्य बदल गया है। उन्होंने कहा कि श्वान तभी उत्तेजित होते हैं, जब वे भूखे होते हैं। श्वानेां का उत्तेजित होना सामाजिक लापरवाही का भी परिणाम है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे प्रदेश भर की जनता से अपील करते हैं कि इन परंपराओं को एक बार फिर अपनाएं।

स्वास्थ्य मंत्री श्री शुक्ल ने इस मामले में कहा कि राज्य में एंटी रेबीज इंजेक्शन की संख्या और गुणवत्ता में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार लोग श्वान के काटने के बाद फौरन अस्पताल नहीं जाते और एक बार रेबीज के ‘हाइड्रोफोबिया’ जैसे लक्षण दिखने के बाद उस मरीज को कोई नहीं बचा पाता। उन्होंने जनता से अपील की कि श्वान के हमले में घायल होने पर फौरन अस्पताल जाएं, नहीं तो बच पाना संभव नहीं होता।

पूर्व मंत्री और पशु रोग चिकित्सक अजय विश्नोई ने चर्चा के दौरान कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने श्वानों की लेप्रोस्कोपी से नसबंदी की पहल कराई थी। भोपाल नगरनिगम ने इस पर काम किया, लेकिन अन्य स्थानों पर नहीं हो सका। उन्होंने इस प्रक्रिया को आवारा श्वानों की समस्या से निपटने के लिए एक प्रभावी कदम बताया।

सदन में चली लंबी चर्चा के दौरान कई विधायकों का डॉग लवर्स पर भी आक्रोश दिखाई दिया। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि डॉग लवर्स का व्यवहार भी आवारा श्वानों को पकड़ने में बाधा साबित होता है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीतासरन शर्मा ने कहा कि नगरीय निकायों के कार्य में डॉग लवर्स समस्या पैदा करते हैं। इस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

विधायक डॉ राजेंद्र पांडेय ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में डॉग लवर्स और आवारा श्वानों को पकड़ने की टीम के आपसी विवादों के कई मामले पुलिस थाने तक पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि खुले में मांस विक्रय और अंडा संग्रहण के कारण भी श्वानों की संख्या बढ़ती है। उन्होंने इसके लिए आबादी वाले स्थानों से दूर व्यवस्था करने का सुझाव दिया।

विधायक शैलेंद्र जैन और गोपाल भार्गव ने भी इस मामले में अपने-अपने सुझाव पेश किए।

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