गोरखपुर, यूपी सरकार और अधिकारियों की लापरवाही से, सीएम योगी के गृहनगर मे अबतक 30 बच्चों की मौत हो चुकी है। गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन खत्म होने से ये मौतें हुयीं है। मरने वाले बच्चे एनएनयू वार्ड और इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती थे।
लापरवाही का आलम यह है कि बुधवार को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था। मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए। इसके बाद मेडिकल कालेज में हाहाकार मच गया। बेड पर पड़े मासूम तड़पने लगे। डॉक्टर और तीमारदार एम्बू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे। लेकिन उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई और 30 बच्चों ने तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ दिया। जबकि दो दिन पहले नौ अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेडिकल कॉलेज का हाल देखकर गये थे।
बताया जा रहा है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया। इसके जरिए इंसेफेलाइटिस वार्ड समेत 300 मरीजों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। इसकी सप्लाई पुष्पा सेल्स करती है। कंपनी पत्र लिखकर बताया कि 68 लाख 58 हजार 596 रुपये का बकाया हो गया है। इसके बावजूद अधिकारियों के कान मे जूं न रेंगी।
बकाया की रकम तय सीमा से अधिक होने के कारण देहरादून के आईनॉक्स कंपनी की एलएमओ गैस प्लांट ने गैस सप्लाई देने से इनकार कर दिया है। भुगतान न होने की वजह से फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी। लिक्विड ऑक्सीजन तो पहले से ही बंद थी और आज सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए।
एक-एक कर बच्चों की हो रही मौत से परेशान डॉक्टरों ने पुष्पा सेल्स के अधिकारियों को फोन कर मनुहार की। उधर कालेज प्रशासन ने 22 लाख रुपये बकाया के भुगतान की कवायद शुरू की। जिसके बाद पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर को भेजने का फैसला किया। जो अभी तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज नही पहुंचा है।
डॉक्टरों ने प्रशासनिक अधिकारियों को संकट की जानकारी दी, मदद भी मांगी। मगर जिले के आला अधिकारी बेपरवाह रहे।इतने बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा। जबकि एसएसबी व कुछ प्राइवेट अस्पतालों ने मदद की। सशस्त्र सीमा बल के अस्पताल ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज को 10 जंबो सिलेंडर दिए।
यदि कहा जाए कि इन मौतों के लिए योगी सरकार से लेकर अधिकारियों की लापरवाही पूरी तरह जिम्मेदार है तो यह गलत नहीं होगा। प्रशासन भले ही आक्सीजन की कमी से हुई मौतों की बात को नकार रहा हो लेकिन अस्पताल प्रशासन से जुड़े पत्राचार और सूत्र अधिकारियों की लापरवाही की ओर ही इशारा कर रहें हैं। जब सीएम के गृह जनपद का ये हाल है तो पूरे प्रदेश मे स्वास्थ्य सेवाओं की क्या हालत है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।