रायबरेली में करोड़ों की ठगी का तीसरा आरोपी गिरफ्तार

रायबरेली, उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में कई बैंक खातों के जरिये 15 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड खुलासा हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को दो दिन पहले गिरफ्तार किया था और, एक आरोपी को आज गिरफ्तार किया गया है। गिरोह का मुख्य सरगना अभी फरार बताया जा रहा है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर अरुण नोहार ने मंगलवार को बताया कि साइबर फ्राड के जरिए करीब 15 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है लेकिन वास्तव में कितनी रकम फ्रॉड में शामिल हैं, अभी ठीक ठीक नही बताया जा सकता है। जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल की जा रही है।

पुलिस के अनुसार यह मामला तब सामने आया, जब परवेज नामक व्यक्ति ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस की साइबर टीम सक्रिय हुई और तकनीकी जांच के बाद एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि इस गिरोह ने अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उन्हीं खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया।

अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस साइबर ठगी गिरोह का संचालन यही के एक मिर्चा कारोबारी द्वारा किया जा रहा था। गिरोह ने टेलीग्राम पर ‘इन्वेस्टमेंट ग्रुप’ बनाकर लोगों को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया। लालच में आकर लोग अपनी जमा पूंजी इन खातों में ट्रांसफर कर देते थे, जिसके बाद रकम अलग-अलग खातों के माध्यम से इधर-उधर की जाती थी।

साइबर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए राज सिंह भदौरिया और सुधांशु सौरभ को दो दिन पहले गिरफ्तार किया गया था जबकि आज मंगलवार को साइबर फ्राड के आरोपी तुषार को गिरफ्तार किया गया है। पूछताछ में कई अहम जानकारियां भी सामने आई हैं, जिनके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

फिलहाल मुख्य सरगना की तलाश जारी है। पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद साइबर ठगी से जुड़ी पूरी हेराफेरी की तस्वीर साफ हो सकेगी। पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिये निवेश के नाम पर दिए जाने वाले प्रलोभनों से सावधान रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पुलिस को दें।

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