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 समाजवादी पार्टी ने किया महान विभूतियों पर गोष्ठी का आयोजन

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश के प्रताप गढ़ जिले में शनिवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय मीराभवन पर ऋषि-मुनियों में श्रेष्ठ महर्षि कश्यप , श्रंगवेरपुर के राजा निषादराज गुह्य एवं महान शासक अशोक सम्राट की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित करते हुए नमन कर गोष्ठी का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऋषि महर्षि कश्यप प्राचीन वैदिक ऋषियों में प्रमुख ऋषि थे। इनकी गणना सप्तर्षि गणों में की जाती है।हिन्दू मान्यता के अनुसार इनके वंशज ही सृष्टि के प्रसार में सहायक हुए। इनके पिता ब्रह्मा के पुत्र मरीचि ऋषि थे। इन्हें परमपिता ब्रह्मा का अवतार माना गया है। जिनका उल्लेख एक बार ॠग्वेद में हुआ है। इन्हें सर्वदा धार्मिक एंव रहस्यात्मक चरित्र वाला बताया गया है।

राजा निषादराज श्रृंगवेरपुर के राजा थे। उनका नाम गुह्यराज था। वे आदिवासी समाज से थे। जिसे कोल, भील, बिंद, केवट, मल्लाह, मझवार, कहार, कश्यप, रैकवार, बाथम, गोडिया, मछुआरा आदि उपनाम से जाना जाता है। उन्होंने ही वनवासकाल में राम, सीता तथा लक्ष्मण को केवटराज जी से कहकर गंगा पार करवाई थी। वनवास के बाद राम ने अपनी पहली रात अपने मित्र श्री निषादराज जी के यहां बिताई।

अशोक सम्राट बौद्ध धर्म के विश्वप्रसिद्ध एवं शक्तिशाली भारतीय मौर्य राजवंश के महान शासक थे। मौर्य राजवंश के चक्रवर्ती सम्राट अशोक राज्य का मौर्य साम्राज्य उत्तर में हिन्दुकुश, तक्षशिला की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी, सुवर्णगिरी पहाड़ी के दक्षिण तथा मैसूर तक तथा पूर्व में बांग्लादेश, पाटलीपुत्र से पश्चिम में अफ़गानिस्तान, ईरान, बलूचिस्तान तक पहुँच गया था। स

म्राट अशोक का साम्राज्य आज का सम्पूर्ण भारत, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान, म्यांमार के अधिकांश भूभाग पर था सम्राट अशोक ही भारत के सबसे शक्तिशाली एवं महान सम्राट है। सम्राट अशोक को ‘चक्रवर्ती सम्राट अशोक’ कहा जाता है और यह स्थान भारत में केवल सम्राट अशोक को मिला है। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य से बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए भी जाना जाता है
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष जगदीश मौर्य, संचालन जिला महा सचिव अब्दुल कादिर जिलानी ने किया।