हमने अंडमान में गुलामी के प्रतीक नाम बदलकर देशभक्तों को दिया सम्मान : प्रधानमंत्री मोदी

श्रीविजयपुरम (अंडमान), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अंडमान निकोबार की पहचान शौर्य और पराक्रम के रूप में रही है और वहां की धरती का संबंध वीर सावरकर तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महान देशभक्तों से रहा है इसलिए वहां पहले गुलामी की पहचान वाले नाम बदले गये और अब नेताजी की जयंती पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती यानि पराक्रम दिवस पर आयोजित समारोह को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि अंडमान निकोबार पराक्रम, शौर्य और बलिदान की भूमि है इसलिए इस साल पराक्रम दिवस का मुख्य आयोजन अंडमान निकोबार में ही आयोजित किया गया है। यहाँ की सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे अनगिनत देशभक्तों की गाथाएँ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इसका संबंध जैसी कुछ बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं। अंडमान की धरती इस विश्वास का प्रतीक है कि स्वतंत्रता का विचार कभी भी समाप्त नहीं होता। इस भूमि पर कितने ही क्रांतिकारियों को यातनाएं दी गईं, यहाँ कितने ही सेनानियों के प्राणों की आहुति हुई लेकिन, स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बुझने की जगह और तेज होती चली गई।

उन्होंने कहा कि सेल्यूलर जेल में वीर सावरकर जैसे अनगिनत देशभक्तों की गाथाएँ, नेताजी सुभाष चंद्र बोस से इसका संबंध जैसी कई बातें पराक्रम दिवस के इस आयोजन को और भी खास बनाती हैं और इन्हीं विशेषताओं का परिणाम है कि अंडमान निकोबार की यही धरती आज़ाद भारत के प्रथम सूर्योदय की साक्षी बनी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 1947 से भी पहले, 30 दिसंबर 1943 को यहाँ समंदर की लहरों को साक्षी रखते हुए भारत का तिरंगा फहराया गया था। इस महान घटना के 75 साल पूरे होने के अवसर पर 30 दिसंबर 2018 को उन्हें अंडमान में उसी स्थान पर तिरंगा फहराने का सौभाग्य मिला था। राष्ट्रगान की धुन पर समंदर के तट पर, तेज हवाओं में लहराता वो तिरंगा जैसे आह्वान कर रहा था कि देखो, आज कितने अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों के सपने पूरे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि बलिदान की भूमि अंडमान निकोबार को गुलामी की पहचान से जुड़ा रहने दिया गया और इसके द्वीप आज़ादी के 70 साल बाद भी अंग्रेज़ अधिकारियों के नाम से जाने जाते थे लेकिन उनकी सरकार ने इतिहास के इस अन्याय को खत्म कर पोर्ट ब्लेयर का नया नाम श्रीविजयपुरम किया जो नेताजी की विजय की याद दिलाती है। इसी तरह, दूसरे अन्य द्वीपों के नाम भी स्वराज द्वीप, शहीद द्वीप और सुभाष द्वीप रखे गए। साल 2023 में अंडमान के 21 द्वीपों के नाम भी भारतीय सेना के जांबाज वीर पुरुष 21 परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर रखे गए। आज अंडमान-निकोबार में गुलामी के नाम मिट रहे हैं, आजाद भारत के नए नाम अपनी पहचान बना रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज़ादी की लड़ाई के महानायक के साथ ही, स्वतंत्र भारत के महान स्वप्न-दृष्टा थे। उन्होंने एक ऐसे भारत की संकल्पना की थी, जिसका स्वरूप आधुनिक हो और, उसकी आत्मा भारत की पुरातन चेतना से जुड़ी हो इसलिए उनके इस विजन से आज की पीढ़ी को परिचित कराना जरूरी है। उनका कहना था कि उनकी सरकार इस दायित्व को बखूबी निभा रही है इसलिए लाल किले में नेताजी सुभाष को समर्पित संग्रहालय बनाया गया और इंडिया गेट के समीप नेताजी की विशाल प्रतिमा लगाई गई है। गणतंत्र दिवस की परेड में हिन्द फौज के योगदान को भी देश ने याद करते हुए सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी शुरू किए हैं। ये विभिन्न कार्य केवल नेताजी सुभाष चंद्र बोस का सम्मान ही नहीं हैं। ये हमारी युवा पीढ़ी के लिए, और भविष्य के भी अमर प्रेरणा के स्रोत हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नेताजी ने हमेशा सशक्त राष्ट्र का सपना देखा आज 21वीं सदी का भारत भी एक सशक्त और दृढ़ प्रतिज्ञ राष्ट्र के तौर पर पहचान बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत को जख्म देने वालों को उनके घर में घुसकर तबाह करने का काम हुआ है। नेताजी के समर्थ भारत के विजन पर चलते हुए देश रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। पहले भारत सिर्फ विदेशों से हथियार मंगाने पर आश्रित रहता था लेकिन आज हमारा रक्षा निर्यात 23 हजार करोड़ को पार कर चुका है। भारत में बनी ब्रह्मोस और दूसरी मिसाइलें, कितने ही देशों का ध्यान खींच रही हैं। हम स्वदेशी की ताकत से भारत की सेनाओं का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

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