
उन्होने अफसोस जताया कि अब तक हमारी कानून व्यवस्था में जजों की जवाबदेही तय नहीं हैं। कानून की डिग्री लेने के बाद भी कई ऐसे वकील हैं जो केवल नाम के हैं, उन्हें कोई नॉलेज नहीं है। प्रशांत भूषण ने ये बातें सशक्तिकरण के लिए न्यायिक जागरुकता की आवश्यकता विषय पर आयोजित टॉक शो में कही। न्यायिक व्यस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि हमारी कानून व्यवस्था में कई बेईमान भर गए हैं, ऐसे में न्याय पाना कठिन होता जा रहा है।
टॉक शो में भूषण ने कहा कि देश में बोलने की आजादी का हनन होना शुरू हो गया। जेएनयू मुद्दे और विनायक सेन के मामले को आधार बनाते हुए भूषण ने कहा कि यदि बोलने की स्वतंत्रता पर ऐसे ही बैन लगते रहे तो जल्दी ही स्थिति और विकराल होगी।