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पेट्रोल और डीजल का उत्पाद शुल्क बढ़ने से सरकार कमायेगी इतने हजार करोड़ ?

नयी दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के मद्देनजर सरकार ने पेट्रोल और डीजल के उत्पाद शुल्क में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है जिससे सरकार को अगले वित्त वर्ष में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का राजस्व मिलने का अनुमान है। हालांकि चालू वित्त वर्ष में अब तीन सप्ताह ही बचे हैं और इस अविध में सरकार को इससे करीब दो हजार करोड़ रुपये मिलने की संभावना है।

इस संबंध में अधिसूचना जारी किये जाने के बाद एक अधिकारी ने कहा कि उत्पाद शुल्क में बढोतरी से करीब 40 हजार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष में दो हजार करोड़ रुपये तक मिल सकता है।अधिसूचना के अनुसार इसके साथ ही सरकार ने पेट्रोल पर सड़क उपकर एक रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। पेट्रोल पर विशेष उत्पाद शुल्क को दो रुपये से बढ़ाकर आठ रुपये प्रति लीटर और डीजल पर चार रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। कुल मिलाकर पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 22.98 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर यह 18.83 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

उत्पाद शुल्क में की गयी इस बढोतरी के बाद तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल की कीमतों में 13 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 16 पैसे प्रति लीटर की कमी की है। राजधानी दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 69.87 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 72.58 रुपये प्रति लीटर हो गयी है। कोलकाता में पेट्रोल 72.57 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 75.57 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 72.57 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है। इसी तरह से कोलकाता में डीजल 64.91 रुपये पप्रति लीटर, मुंबई में 65.51 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 66.02 रुपये प्रति लीटर हो गया है।

नवंबर 2014 और जनवरी 2016 के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में गिरावट पर पेट्रोल अौर डीजल पर उत्पाद शुल्क में नौ बार बढोतरी की गयी। इस दौरान 15 महीने में पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में 11.77 रुपये और डीजल पर 13.47 रुपये प्रति लीटर की बढोतरी की गयी। अक्टूबर 2017 में सरकार ने इन दोनों उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में दो रुपये प्रति लीटर की कमी की थी। इसके एक वर्ष बाद फिर से 1.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गयी लेकिन जुलाई 2019 में इसमें दो रुपये प्रति लीटर की बढोतरी की गयी थी।