उत्तर भारत में बदला मौसम : कश्मीर, उत्तराखंड में हिमपात, दिल्ली-एनसीआर में बारिश से जनजीवन प्रभावित

नयी दिल्ली, उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में शुक्रवार को मौसम के बदले मिजाज के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। कश्मीर घाटी और उत्तराखंड में हिमपात, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के कारण जनजीवन खासा प्रभावित हुआ।
कश्मीर घाटी में भारी हिमपात और जम्मू संभाग में मूसलाधार बारिश के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-44) को यातायात के लिए बंद कर दिया गया। रामसू और बनिहाल के बीच भारी बर्फ जमा होने के कारण सड़कें अत्यधिक फिसलन भरी हो गई, जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर उधमपुर के जखानी चौक पर वाहनों की आवाजाही रोक दी है। राजमार्ग पर फंसे यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने और मौसम साफ होने तक प्रतीक्षा करने की सलाह दी गई है।
घाटी में हो रही हिमपात का सबसे व्यापक असर हवाई सेवाओं पर पड़ा है। श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर दृश्यता कम होने और रनवे पर बर्फ की मोटी परत जमा होने के कारण सभी उड़ानों को रद्द कर दिया गया है। इंडिगो और अन्य प्रमुख एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए विशेष यात्रा परामर्श जारी किया है, जिसमें उन्हें हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की निरंतर जांच करने को कहा गया है। हवाई अड्डा अधिकारियों ने बताया कि रनवे से बर्फ हटाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है, लेकिन लगातार हो रहे हिमपात और खराब दृश्यता के कारण परिचालन बहाल करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
जम्मू संभाग के मैदानी इलाकों में सुबह से ही बारिश का सिलसिला जारी है, जबकि रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों पर सीजन का पहला भारी हिमपात दर्ज किया गया है। इसके कारण प्रसिद्ध माता वैष्णो देवी की यात्रा को एहतियातन अस्थायी रूप से रोक दिया गया है और कटरा आधार शिविर से भवन तक जाने वाली हेलीकॉप्टर सेवाएं भी पूरी तरह निलंबित कर दी गई हैं। डोडा, किश्तवाड़ और भद्रवाह जैसे ऊंचे पहाड़ी इलाकों में लगभग तीन महीने के लंबे शुष्क दौर के बाद हुई इस बर्फबारी से स्थानीय किसानों ने राहत की सांस ली है, हालांकि पूरे क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है।
दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आसपास आज सुबह से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने फिर से ठंड बढ़ा दी है। आसमान में घने बादल छाए रहने और ठंडी हवाओं के चलने से अधिकतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण दिल्ली के कई हिस्सों में मध्यम बारिश हुई है, जिससे वायु प्रदूषण के स्तर में कुछ सुधार तो हुआ है लेकिन सड़कों पर जलजमाव के कारण सुबह के समय दफ्तर जाने वालों को भारी यातायात जाम का सामना करना पड़ा।
उत्तराखंड में भी सुबह तड़के से राज्य के ऊंचाई वाले स्थानों पर इस ऋतु की पहली बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश शुरू हो गई। इससे पूरे राज्य में शीतलहर का प्रकोप हो गया है। आमतौर पर दिसंबर माह से राज्य में बर्फबारी और बारिश शुरू हो जाती है, इससे पहाड़ी इलाकों में होने वाले फलों और अन्य कृषि उपजों की बेहतर उत्पादकता होती है। अब लगभग एक महीने विलंब से मौसम बदलने से काफी हद तक लाभदायी स्थिति मजबूत हुई है।
सुबह से ही टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चमोली, रुद्रप्रयाग और देहरादून जिलों के ऊंचाई वाले स्थानों में हिमपात शुरू हुई। इसके साथ ही, विशेषकर देहरादून के मैदानी इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश भी शुरू हो गई। मसूरी, यमुनोत्री, गंगोत्री, बदरीनाथ, तुंगनाथ, केदारनाथ, सुक्की टॉप, हर्षिल, चकराता आदि स्थानों पर रुक रुक कर लगातार बर्फवारी होने से पर्यटकों के साथ होटल कारोबारियों में एक अलग तरह की खुशी का आलम है।
उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्थान सुक्की टॉप से गंगोत्री तक हिमपात के कारण बाधित हुआ हैं। बागेश्वर, चमोली, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी, उत्तरकाशी के रूड़की, डोईवाला, मसूरी, चिन्यालीसौड़, देवप्रयाग, श्रीनगर, कपकोट, डीडीहाट, थराली तथा इनके आस पास के क्षेत्रों में हल्की बारिश दर्ज की गयी। बागेश्वर, चमोली, देहरादून, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तर काशी के विशेषकर, बडकोट, पुरोला, चकराता, सोनप्रयाग, कर्णप्रयाग, बद्रीनाथ, जोशीमठ, थराली, कपकोट, बेरीनाग तथा इनके आस पास के क्षेत्रों मे भारी बारिश, हिमपात बर्फ़ीला तूफान (2300 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर) आने का अनुमान जताया गया है।
नैनीताल जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुक्तेश्वर में एक बार फिर मौसम ने करवट बदली और हिमपात का तोहफा दिया है। देर रात से आज सुबह तक हुए हिमपात से पूरा मुक्तेश्वर क्षेत्र सफेद चादर में ढक गया, जिससे ठंड बढ़ गयी है। बर्फ गिरते ही तापमान में तेज गिरावट आई और कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। मुक्तेश्वर में हिमपात के बाद देवदार, चीड़ के जंगल, सड़कें और छतें बर्फ से ढक गई हैं। चारों ओर फैली सफेदी ने इलाके को बेहद खूबसूरत बना दिया है। हिमपात का नजारा देखने के लिए स्थानीय लोग सुबह-सुबह अपने घरों से बाहर निकलते नजर आए। बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने बर्फ से खेलकर इस मौसम का आनंद लिया।
हिमपात होने की खबर मिलते ही पर्यटकों के चेहरे भी खिल उठे हैं। पहले से मुक्तेश्वर में मौजूद सैलानी बर्फबारी का लुत्फ उठाते दिखाई दिए, वहीं कई पर्यटक अब नैनीताल और मुक्तेश्वर का रुख कर रहे हैं। होटल व्यवसायियों के अनुसार बर्फबारी के चलते पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलेगा।
समूचे उत्तर भारत के अन्य राज्यों जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी गरज के साथ बौछारें पड़ने की खबरें हैं। यह बारिश रबी की फसलों, विशेष रूप से गेहूं के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा वरदान मानी जा रही है, क्योंकि यह फसल के विकास के लिए अत्यंत लाभकारी है। हालांकि, ग्रामीण इलाकों में बिजली लाइनों के क्षतिग्रस्त होने से कई जगहों पर आपूर्ति बाधित हुई है। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटों तक पहाड़ी राज्यों में हिमपात और मैदानी इलाकों में बारिश की यह स्थिति बनी रह सकती है।
विभिन्न राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासनों ने मौसम विभाग द्वारा जारी ‘येलो अलर्ट’ के बीच जिला आपदा प्रबंधन इकाइयों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और लोक निर्माण विभाग की टीमें अवरुद्ध रास्तों को साफ करने के काम में जुटी हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी बढ़ती ठंड को देखते हुए बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरतने के परामर्श जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी वैकल्पिक रास्तों को दुरुस्त रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, शनिवार को उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव बना रहेगा, हालांकि इसकी तीव्रता में आज के मुकाबले कमी आ सकती है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम हिमपात और निचले क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। विशेष रूप से उत्तराखंड के कई जिलों में गरज के साथ बिजली गिरने और ओलावृष्टि होने के अनुमान के मद्देनजर ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में इस मौसमी गतिविधि के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठिठुरन और बढ़ने के आसार हैं। एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ के 26 जनवरी को उत्तर पश्चिम भारत प्रभावित हो सकता है।
मैदानी इलाकों के दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शनिवार को बारिश की गतिविधियों में कमी आएगी और आसमान मुख्य रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। हालांकि, पूर्वी उत्तर प्रदेश में कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। बारिश के इस दौर के बाद उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के चलने से दिल्ली और आसपास के राज्यों में न्यूनतम तापमान में दो से चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में घना कोहरा लौटने और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में शीतलहर जैसी स्थिति बनने की चेतावनी भी जारी की गयी है।





