“संत रविदास जी के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हैं: हरीश चन्द्र

लखनऊ, महान संत, समाज सुधारक एवं मानवता के प्रबल प्रवक्ता संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती के पावन अवसर पर भारत जन ज्ञान विज्ञान समिति द्वारा अपने इंदिरा नगर स्थित कार्यालय में एक संगोष्ठी आयोजित कर उनके विचारों और संदेशों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर भारत जन ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आई.ए.एस. हरीश चन्द्र ने अपने संबोधन में कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से समाज में व्याप्त जाति-पांति, भेदभाव और आडंबर का विरोध किया तथा समता, प्रेम, करुणा और मानवता का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि गुरु रविदास केवल एक संत नहीं थे वरन् उस युग की सबसे निर्भीक वैचारिक चुनौती थे, जिसने पाखंड अंधविश्वास और गलत परंपराओं के आवरण में चल रहे सामाजिक आतंक को सीधे ललकारा। उन्होंने मनुष्य की गरिमा को सम्मान से जोड़ा। उन्होंने श्रम की पवित्रता को परिभाषित किया तथा अनुभव और विवेक से सत्य को खोजा। उनकी बेगमपुरा एक कविता नहीं वरन् उस समय का एक सामाजिक नियमन था, जहां कोई न तो नीच था और न ही वहाँ श्रम का अपमान था। उन्होंने अपने संबोधन में संत रविदास के दोहे का

उल्लेख किया –
रैदास जन्म के कारने, होत न कोऊ नीच।
निज करमन के कारने, होत ऊंच अरु नीच।।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध गांधी विचारक राम धीरज ने कहा कि संत रविदास ने उस समय की स्थापित विचारधारा को चुनौती दी तथा अपनी तपस्या और मेहनत से आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त की। उन्होंने कहा कि उनकी विचारधारा थी कि कर्म और सत्य के राह चलने पर ही दुनिया बदलेगी। वे समाज को शिक्षा देने का कार्य करते थे ताकि समाज प्रेरणा ले सके।

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि एवं विशेष सचिव गृह अटल कुमार राय ने कहां कि भारत ऋषियों एवं गुरुओं की धरती रही है। संत रविदास उसी श्रृंखला के थे। वे सच्चे कर्मयोगी थे। आज हमें उनसे प्रेरणा लेकर जाति- पांति खत्म करने हेतु प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका प्रसिद्ध विचार “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी समाज को आत्मचिंतन और नैतिक जीवन की प्रेरणा देता है।
संगोष्ठी को बसंत लाल, पी.सी. कुरील,राम शब्द जैसवार वी.के. मधुकर तथा जयप्रकाश आदि गणमान्य लोगों ने भी संबोधित किया।

उनका मानना था कि-
“संत रविदास जी के विचार आज के समय में और भी प्रासंगिक हैं। उनका जीवन हमें समानता, भाईचारे और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”

इस अवसर पर सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे संत रविदास जी के विचारों को अपने जीवन में अपनाएँ और समरस, समान और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दें।

भारत जन ज्ञान- विज्ञान समिति के सचिव राजेंद्र सिंह यादव ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।

संगोष्ठी का सफल संचालन सुरेश उजाला/उपनिदेशक सूचना (अ. प्रा.) ने किया।

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