अर्थव्यवस्था दुर्लभ संतुलन में, मध्य वर्ग का हुआ है विस्तार : निर्मला सीतारमण

नयी दिल्ली,  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में इस समय दुर्लभ संतुलन की स्थिति में है जहां उच्च आर्थिक वृद्धि के साथ मुद्रास्फीति लंबे समय तक निम्न स्तर पर चल रही है।

निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को राज्यसभा में बजट 2026-27 पर चार दिन की सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि इस समय बेरोजगारी दर भी निम्न स्तर पर है तथा पिछले एक दशक में करदाताओं की संख्या दोगुना होकर 12 करोड़ से ऊपर पहुंच गयी है। चर्चा के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गये मुद्दों का जवाब देते हुए उन्होंने इस बात को खारिज किया कि इस समय मध्य वर्ग को दबाया जा रहा है।

वित्त मंत्री ने कहा कि केवल इसी आधार पर यह कहना गलत है कि मध्य वर्ग मंहगाई और ऊंचे कर के दो पाटों के बीच पिस रहा है कि व्यक्तिगत आयकर प्राप्तियां कारपोरेट कर से ऊंची हो गयी है। उन्होंने कहा कि देश में मध्य वर्ग का विस्तार हुआ है। वर्ष 2013-14 से 2024-25 के बीच आयकर विवरण भरने वाले और कर देने वाले करदाताओं की संख्या 5.26 करोड से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गई है। व्यक्तिगत आयकर वसूली में पिछले सात वर्षों से साल दर साल 7.9 प्रतिशत की दर से वृद्धि हो रही है।

उन्होंने कहा, “मिडिल क्लास दबा होता तो वह कर देने नहीं आता।” वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले बजट में 12 लाख रुपए सालाना तक की व्यक्तिगत आय पर छूट का उल्लेख करते हुए कहा कि वेतनभोगियों पर 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कर नहीं लगता, मानक कटौती भी बढ़ा दी गई है, नये करे ढांचे को सरल बनाया गया है, जीएसटी में पिछले साल सितंबर में किये गये सुधारों से जीवन यापन की लागत कम हुई है और मुद्रास्फीति ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर हैं।

निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2015 से 2025 के दौरान मुद्रास्फीति का जो स्तर रहा है उससे पहले कभी इससे नीचे नहीं थी। खुदरा मुद्रास्फीति 2025-26 में औसतन दो प्रतिशत के स्तर पर चल रही है, इसके विपरीत विकसित देशों में यह भारत से ऊंचे स्तर पर है। ब्रिटेन में मुद्रास्फीति का आंकड़ा 3.4 प्रतिशत और अमेरिका में 2.7 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने कहा, “यह संयोग नहीं बल्कि रणनीति का फल है। सरकार ने राजकोषीय व्यापारिक नीति तथा आपूर्ति क्षेत्र के प्रबंध के जरिए इसे हासिल किया है।”

उन्होंने कहा कि खाद्य वस्तुओं पर शुल्क को इस तरह संचालित किया जाता है ताकि देश में उनकी आपूर्ति महंगी नहीं हो और घरेलू किसान भी दबाव में नहीं रहें, सरकार बफर स्टाक रखती है, आवश्यक खाद्य वस्तुओं को देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में रेलवे के जरिए भेजा जाता है ताकि उसकी लागत कम हो। माल एवं सेवाकर को तर्क संगत बनाने से भी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी आई है। उन्होंने कहा, “इस तरह के गतिशील प्रबंधन से मुद्रास्फीति इस समय रिजर्व बैंक के स्वीकार दायरे (दो से छह प्रतिशत) से भी नीचे हैं।

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