राजनाथ सिंह ने नौसैनिक अनुसंधान व परीक्षण क्षमता बढ़ाने के लिए कैविटेशन टनल की आधारशिला रखी

नयी दिल्ली, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रमुख प्रयोगशाला नौसेना विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल) में अत्याधुनिक “लार्ज कैविटेशन टनल (एलसीटी)” का शिलान्यास किया।
यह सुविधा देश की नौसैनिक अनुसंधान और परीक्षण क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाएगी और तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम सिद्ध होगी।
रक्षा मंत्री ने एनएसटीएल में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस पहल के माध्यम से भारत अपने संसाधनों का उपयोग करते हुए उपकरणों, प्रणालियों एवं उप-प्रणालियों का स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकास और परीक्षण करने में सक्षम होगा तथा एक सशक्त नौसैनिक शक्ति और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में स्थापित होगा।
उन्होंने कहा, “अब तक, उपकरणों, प्रणालियों और उप-प्रणालियों के सफल विकास के बाद भी हमें महत्वपूर्ण परीक्षणों के लिए विदेशों की ओर देखना पड़ता था। अब यह स्थिति बदलेगी। यह सुविधा केवल एक अवसंरचना परियोजना नहीं है, बल्कि एक सक्षम प्रणाली है, जो प्रणोदन प्रणालियों के विकास को सुदृढ़ करेगी, शोर में कमी लाने के प्रयासों को सक्षम बनाएगी और स्टेल्थ क्षमताओं को और मजबूत करेगी। यह पनडुब्बियों और जहाजों के डिजाइन एवं विकास के लिए एक आधारभूत ढांचा प्रदान करेगी तथा नौसैनिक अभियांत्रिकी और समुद्री रक्षा प्रणालियों में भविष्य की प्रगति को समर्थन देगी।”
राजनाथ सिंह ने इस परियोजना को ‘आत्मनिर्भर भारत’ संकल्प की सफलता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सरकार का संकल्प राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र से गहराई से जुड़ा हुआ है और चुनौतियों के बावजूद देश ने घरेलू उद्योग, शिक्षाविदों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), युवाओं और शोधकर्ताओं के संयुक्त प्रयासों से विभिन्न क्षेत्रों में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्राप्त की है।
रक्षा मंत्री को रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत द्वारा एनएसटीएल की परियोजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई।
राजनाथ सिंह ने “सीकीपिंग एंड मैन्युवरिंग बेसिन” का भी दौरा किया, जहां उन्होंने उन्नत जलमग्न प्रणालियों जैसे टॉरपीडो, नौसैनिक खदानें, डिकॉय और स्वायत्त जलमग्न वाहनों (एयूवी) का प्रभावशाली प्रदर्शन देखा।
पोर्टल एयूवी के समूह (स्वार्म) का लाइव प्रदर्शन भारत की स्वायत्त समुद्री संचालन और अगली पीढ़ी की जलमग्न युद्ध तकनीकों में बढ़ती क्षमता को दर्शाता है, जो भविष्य के लिए तैयार रक्षा प्रणालियों पर देश के फोकस को रेखांकित करता है। रक्षा मंत्री ने “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद नौसैनिक प्रणालियों एवं सामग्री क्लस्टर प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित कुछ महत्वपूर्ण उत्पादों का भी निरीक्षण किया।
राजनाथ सिंह ने टॉरपीडो प्रणालियों, जलमग्न खदानों, डिकॉय और एयूवी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान करने और मानक स्थापित करने के लिए एनएसटीएल की सराहना की तथा भारत को एक शक्तिशाली नौसैनिक शक्ति बनाने की दिशा में उसके योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने स्वार्म तकनीक के प्रदर्शन और लिथियम-आयन बैटरी विकास पर चल रहे कार्य को भविष्य के युद्ध की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा मंत्री ने एनएसटीएल से आग्रह किया कि वह देश की सुरक्षा अवसंरचना को मजबूत करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पण के साथ कार्य करता रहे। उन्होंने कहा, “ये प्रणालियाँ और प्रौद्योगिकियाँ समुद्र में तैनात नाविकों के आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाती हैं। विश्वसनीय और सुदृढ़ तकनीकी समर्थन रक्षा बलों की संचालन क्षमता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है।”
इस अवसर पर प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, पूर्वी नौसैनिक कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय भल्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
लार्ज कैविटेशन टनल एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में परिकल्पित परियोजना है जो हाइड्रोडायनामिक अनुसंधान में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के जहाजों, पनडुब्बियों और जलमग्न प्लेटफॉर्मों के डिजाइन एवं विकास को बढ़ावा देना है। यह परियोजना, जिसे सरकार द्वारा स्वीकृत किया गया है और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, वैश्विक विशेषज्ञता और स्वदेशी नवाचार का उत्कृष्ट समन्वय दर्शाती है।
यह सुविधा एकीकृत व्यवस्था के तहत पनडुब्बी अध्ययन के लिए आवश्यक क्लोज्ड-लूप सिमुलेशन तथा सतही जहाजों के अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण फ्री-सर्फेस सिमुलेशन दोनों को संचालित करने की क्षमता के साथ वैश्विक स्तर पर अद्वितीय अवसंरचना के रूप में उभरने के लिए तैयार है। इसके संचालन में आने के बाद यह देश के जहाज निर्माण तंत्र को सुदृढ़ करेगी और विध्वंसक जहाजों तथा विमान वाहक पोतों सहित प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्मों के लिए हाइड्रोडायनामिक डिजाइन और प्रणोदन प्रणालियों के सटीक परीक्षण को संभव बनाएगी।





