समाजवादी डेलिगेशन फिर जाएगा गाज़ीपुर, जानिए क्यों?

“कुछ घटनाएं सिर्फ खबर नहीं होतीं… वो दिल को झकझोर देती हैं।” “गाज़ीपुर की निशा हत्याकांड भी ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी है…
जिसने पूरे प्रदेश को सोचने पर मजबूर कर दिया।” “हाल ही में गाज़ीपुर में हुई इस घटना ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया…”
“जिसके बाद समाज के कई वर्गों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।” “इस घर में अब खामोशी है… और आंखों में सिर्फ सवाल।”
“घटना के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ… जांच शुरू हुई…” “लेकिन सवाल अब भी बाकी हैं…”
क्या है हकीकत आइए सबसे पहले समझते हैं—क्या है पूरा मामला।” 15 अप्रैल 2026 जनपद गाजीपुर की विधान सभा क्षेत्र सदर के अन्तर्गत , ग्राम कटरिया थाना करण्डा निवासी श्री सियाराम विष्वकर्मा की, नाबालिग पुत्री की दबंगो ने बलात्कार के बाद हत्या कर शव गंगा नदीं में फेंक दिया। 16 वर्षीय निशा विश्वकर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई । परिवार का सीधा आरोप है—हरिओम पांडेय पर। परिवार का आरोप है कि निशा विश्वकर्मा के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई।
22 अप्रैल 2026 अखिलेश यादव के निर्देश पर पूर्व मंत्री रामआसरे विश्वकर्मा के साथ घटना की जानकारी लेने तथा शोकाकुल परिवार से मिलने हेतु सपा का एक प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिलने कटारिया गांव जा रहा था, उन पर पत्थरों से हमला किया गया था जिसमें पूर्व मंत्री राम आसरे विश्वकर्मा सहित तमाम लोग घायल हो गए थे। कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए थे। पुलिस ने सपा के समर्थकों पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में अब तक कुल 16 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. गांव में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और पुलिस बल तैनात है. इसके साथ ही पुलिस अन्य अज्ञात आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश में जुटी हुई है.
इस बवाल के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए , पूरे इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए, निषेधाज्ञा (धारा 163) लागू कर दी है. जिला प्रशासन ने कई तरह की गतिविधियों पर रोक लगा दी है. सपा प्रतिनिधि मंडल के घायल नेताओं ने आज अखिलेश यादव से पार्टी के प्रदेश मुख्यालय लखनऊ में भेंट की।
विपक्ष का सत्ता पर सीधा हमला: विपक्ष का कहना है कि प्रधान का रसूख जांच को प्रभावित कर रहा है। क्योंकि आरोपी पक्ष को गांव के प्रभावशाली लोगों का मौन समर्थन प्राप्त है?
“आरोप है कि रसूखदार लोग जांच की दिशा मोड़ने की ताकत रखते हैं। जब गांव के मुखिया पर ही पक्षपात के आरोप लगें,
तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?””न्याय मिलना चाहिए…””इस बीच समाजवादी पार्टी ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का निर्णय लिया।”समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर,समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमण्डल दिनांक 28.04.2026 को पुनः गाजीपुर जायेगा।समाजवादी प्रतिनिधिमण्डल गाजीपुर जाकर पीड़ित परिवार से ,पूर्वाह्न 09ः00ब जे मिलेगा और पांच लाख रूपये की आर्थिक मदद देगा।इसमें दो लाख रूपया विष्वकर्मा समाज और तीन लाख रूपया , समाजवादी पार्टी की ओर से दिया जाएगा।
प्रतिनिधिमण्डल में पूर्व मंत्री उ0प्र0 सरकार रामआसरे विश्वकर्मा , जैकिशन साहू विधायक, श्रीमती सीमा राजभर राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजवादी महिला सभा एवं श्रीमती रीता विश्वकर्मा नेता समाजवादी पार्टी शामिल है।
अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी आफिस में प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि-‘गाजीपुर में हमारे लोगों के साथ बहुत गलत हुआ और सब सरकार के इशारे पर हुआ और वहां कानूनी धाराएं लगाई जा रही हैं कि वहां कोई पहुंच नहीं पाए. जब बीजेपी वाले खुद कुछ नहीं कर पा रहे हैं तो दूसरों के पीछे खड़े होकर काम कर रहे. कल हमारा एक प्रतिनिधिमंडल फिर से गाजीपुर जायेगा, जिसकी अध्यक्षता राम आसरे विश्वकर्मा और महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर करेंगी और पीड़ित परिवार की 5 लाख रूपए की आर्थिक मदद करेंगे.’
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर हमला करते हुए कहा, “यूपी में जब से बीजेपी की सरकार बनी है तब से बहनों और बेटियों पर अत्याचार बढ़ा है. बीजेपी वाले महिलाओं के नाम पर रैलियां और प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन गाजीपुर की बेटी जिस हालत में मिली एक बार उसकी तस्वीर तो देख लेते.”
उन्होंने कहा, “सबसे ज्यादा महिलाएं और बेटियां अगर कहीं असुरक्षित हैं तो वो उत्तर प्रदेश ही है. यहां के जो आंकड़े बताते हैं, उसके आधार पर सबसे ज्यादा घटनाएं उत्तर प्रदेश में ही हो रही हैं महिलाओं और बेटियों के ख़िलाफ ही हैं. अखिलेश यादव ने कहा कि परिवार ने अगर शक जताया है तो जांच होनी चाहिए, जहां बेटी की लाश मिली हैं वहां तो 2 फ़ीट पानी भी नहीं है.
अखिलेश यादव का ये कहना कि – “हमारा प्रतिनिधिमंडल गाज़ीपुर जाएगा… और 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगा।” “यह सिर्फ आर्थिक मदद नहीं… बल्किपीड़ित परिवार के साथ खड़े होने का संदेश है।” “ऐसे समय में संवेदना और सहयोग ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं।” “हमें उम्मीद है कि न्याय मिलेगा…” “दर्द बड़ा है… लेकिन उम्मीद अभी बाकी है।” “जरूरत है साथ की… संवेदनशीलता की… और न्याय की। “मानवता सबसे ऊपर”




