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कक्षा नौ से 12 तक का वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर जारी

नयी दिल्ली , माध्यमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर को जारी किया कर दिया गया है। इसके पहले प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) एवं उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की कक्षाओं के छात्रों के लिए ये कैलेंडर पहले ही जारी किया जा चुका है।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने माध्यमिक कक्षाओं के छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से बनाये गये वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर को शनिवार को जारी किया।

डॉ निशंक ने कहा कि इस कैलेंडर को बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों की मदद से बनाया गया है ताकि बच्चे रुचिपूर्वक अर्थपूर्ण शिक्षा ग्रहण कर सकें। इस वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर को बनाते समय नई तकनीकों एवं सोशल मीडिया को तरजीह दी गयी है जिससे कि बच्चे घर पर इन तकनीकों के प्रयोग से आनंदपूर्वक और रुचिपूर्ण ढंग से शिक्षा ग्रहण कर सकें।

उन्होंने कहा,“इस कैलेंडर के माध्यम से अध्यायक विभिन्न तकनीकों और सोशल मीडिया प्लेटफार्म का प्रयोग करके घर से ही बच्चों को अभिभावकों की देख रेख में पढ़ा सकते हैं। हो सकता है कि कुछ लोगों के पास मोबाइल फ़ोन पर या घर पर इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध ना हो और वो सोशल मीडिया का उपयोग ना करते हों ऐसे में इस वैकल्पिक कैलेंडर में अध्यापकों के लिए ये दिशानिर्देश भी हैं कि वो विद्यार्थियों को मोबाइल पर एस.एम.एस भेजकर या फ़ोन पर कॉल कर के उनका मार्गदर्शन करें। इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होने की स्थिति में अध्यापक, अभिभावक और बच्चे व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर, टेलीग्राम, गूगल मेल और गूगल हैंगऑउट द्वारा एक दूसरे से जुड़ सकते हैं और पढाई जारी रख सकते हैं।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कैलेंडर में कक्षा नौ से कक्षा 12 तक के सभी विषय शामिल किये गए हैं. इस कैलेंडर द्वारा सभी बच्चों जिनमें दिव्यांग भी शामिल हैं की सीखने की जरूरत का ध्यान रखा गया है. सभी बच्चों को ऑडियो बुक्स, रेडियो कार्यक्रमों, आदि के द्वारा छात्रों की जरूरतों को संबोधित किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि इस कैलेंडर को साप्ताहिक आधार पर जारी किया जायेगा और इसमें पाठ्यक्रम के अनुसार विषयों को रुचिकर और चुनौतीपूर्ण गतिविधियों द्वारा सम्मिलित किया गया है. इस कैलेंडर की सबसे प्रमुख बात यह है कि इन गतिविधियों की मैपिंग छात्रों की सीखने के प्रतिफलों के साथ की गई है. इसके द्वारा अभिभावक और अध्यापक बच्चों की प्रगति पर भी नजर बनाये रखेंगे और पाठ्यपुस्तकों के अलावा भी बच्चों को नई चीज़ें सीखने के लिए प्रेरित करेंगे।

डॉ निशंक ने कहा कि इस कैलेंडर में अनुभव आधारित शिक्षा के लिए कला और शारीरिक शिक्षा के साथ साथ योग भी शामिल किया गया है. तनाव और चिंता को दूर करने के तरीके भी इस कैलेंडर में सुझाये गए हैं. फ़िलहाल ये कैलेंडर में चार भाषाओँ के विषयों को शामिल किया गया है — संस्कृत, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी. इस वैकल्पिक कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर अध्यायवार उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने केंद्रीय मंत्री ने इस कैलेंडर पर उपलब्ध गतिविधियों के बारे में कहा कि सभी गतिविधियां सुझाव के तौर पर शामिल की गयी है न कि किसी आदेश की तरह थोपी गई हैं। इस क्रम में किसी के ऊपर कोई बाध्यता नहीं है। अध्यापक और अभिभावक बिना क्रम पर ध्यान दिए विद्यार्थियों की रूचि वाली गतिविधि का चयन कर सकते हैं।

एनसीईआरटी ने टीवी चैनल स्वयं प्रभा (किशोर मंच) (फ्री डीटीएच चैनल #128, डिश टीवी चैनल # 950, सनडायरेक्ट # 793, जिओ टीवी, टाटा स्काई # 756, एयरटेल चैनल # 440, वीडियोकॉन चैनल # 477), किशोर मंच एप (प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है) और यूट्यूब लाइव (एनसीईआरटी आधिकारिक चैनल) के माध्यम से छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ लाइव इंटरेक्टिव सत्र शुरू कर दिया है। सोमवार से शनिवार इन सत्रों का प्रसारण प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक प्राथमिक कक्षाओं के लिए और अपराह्न 2 बजे से अपराह्न 4 बजे तक उच्च प्राथमिक कक्षाओं के किया जा रहा और जल्द ही माध्यमिक स्तर के सुबह 9 बजे से 11 बजे तक किया जायेगा. दर्शकों के साथ बातचीत करने के अलावा, इन लाइव सत्रों में विषयों के शिक्षण के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियां भी दिखाई जा रही हैं।

इस कैलेंडर को एससीईआरटी , राज्य स्कूल शिक्षा विभाग, स्कूल शिक्षा बोर्ड्स, केन्द्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, इत्यादि संस्थाओं के साथ विडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डीटीएच चेनलों द्वारा प्रसारित और प्रचारित किया जायेगा। यह विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल के प्राचार्यों को सशक्त करेगा, ऑनलाइन संसाधनो का उपयोग कर सकारात्मक तरीकों से कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करने में तथा बच्चो को घर पर ही उत्तम शिक्षा उपलब्ध करवाने में मदद करेगा।