सोने- चांदी पर लगा ब्रेक, क्या यही है खरीदने का सही समय..?

लखनऊ, जिसकी आशंका थी, वही हुआ। सोने और चांदी में आई तेजी पर शुक्रवार से ब्रेक लग गए। सिर्फ ब्रेक ही नहीं लगे, बल्कि इनकी चाल ही उल्टी हो गई। रॉकेट की रफ्तार से चढ़ें सोने-चांदी के दाम अब अपने ऑल टाइम हाई से काफी सस्ते हो गए हैं. दुनिया भर के बाजारों में सोने-चांदी के भाव में बीते दो दिनों से भारी गिरावट देखी जा रही है.
कल यानि 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 पेश करने वाली है. बजट से ठीक पहले सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है. पिछले एक साल में निवेशकों को मालामाल करने के बाद, शुक्रवार से सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट देखी जा रही है. बजट से पहले सोना लगबग 40,000 रुपये सस्ता हो गया है.
दोनों धातुओं में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले साल इन्होंने निवेशकों को जबरदस्त रिटर्न दिया था। सोने ने साल 2025 में करीब 70 फीसदी और चांदी ने करीब 170 फीसदी रिटर्न दिया है। अब इसमें आई गिरावट के बाद उन निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि सोना और चांदी को खरीदने का क्या यह सही समय है या नहीं?
आज, 31 जनवरी को भी इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड-सिल्वर (Gold-Silver Prices Crash) के रेट घटे हैं . हालांकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज आज बंद है. MCX में ट्रेडिंग शनिवार और रविवार को नहीं होती है. कल यानी 1 फरवरी को MCX खुला रहेगा. लेकिन पिछले दो सेशन के आंकड़े साफ बता रहे हैं कि सोना-चांदी में आई हालिया तेजी के बाद अब तेज करेक्शन देखने को मिल रहा है.
अब निवेशकों और आम आदमी के मन में ये तीन सवाल उठ रहें हैं-
• आखिर क्या है इस बड़ी गिरावट के पीछे की असली वजह?
• क्या अभी सोना-चांदी और सस्ता होगा?
• सोना और चांदी को खरीदने का क्या यह सही समय है या नहीं?
इस बड़ी गिरावट की वजह
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने केविन वॉर्श को नया यूएस फेडरल चेयर नियुक्त किया। इस खबर के बाद अमेरिकी डॉलर में मई 2023 के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त देखी गई। वॉर्श की नियुक्ति से केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं कम होने के बाद, यूएस डॉलर इंडेक्स 97 के पार चला गया।
सोना-चांदी और सस्ता होगा?
मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने और चांदी दोनों के लिए अच्छा नहीं होता। ऐसा इसलिए है क्योंकि सोने और चांदी की कीमतें वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में तय होती हैं। जब डॉलर मजबूत होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए ये धातुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे इनकी मांग कम हो जाती है। इसके अलावा जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो चांदी जैसी बिना ब्याज वाली संपत्तियों का आकर्षण कम हो जाता है।
क्या सोना चांदी खरीदने का यह सही समय?
अगर चांदी की आपूर्ति में कमी बनी रहती है और भू-राजनीतिक जोखिम ऊंचे बने रहते हैं, तो चांदी अपनी तेजी जारी रख सकती है। खासकर इसलिए क्योंकि अब चांदी को एक रणनीतिक और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण धातु के रूप में पहचाना जा रहा है। एक्सपर्ट के मुताबिक ऐतिहासिक रूप से चांदी बहुत अस्थिर रही है। इसलिए किसी भी समय भारी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता। तकनीकी संकेतक बताते हैं कि बाजार ओवरबॉट (बहुत ज्यादा खरीदा हुआ) है, जिससे अल्पावधि में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है। वहीं अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मजबूत सुरक्षित आश्रय की खरीदारी की मांग के कारण इसकी कीमत में आगे तेजी देखी जा सकती है।
सोना विश्व स्तर पर डॉलर में ट्रेड किया जाता है, इसलिए वैश्विक मांग-आपूर्ति का सबसे बड़ा असर पड़ता है। युद्ध या अस्थिरता के समय सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है, जिससे इसकी मांग और कीमत बढ़ जाती है।
अब यदि डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो भारत में सोना महंगा हो जाता है।
भारत सरकार द्वारा सोने के आयात पर लगने वाला शुल्क और GST अंतिम मूल्य को प्रभावित करते हैं।
त्योहारों, शादियों के सीजन में भारत में मांग बढ़ने पर कीमतें अक्सर बढ़ जाती हैं।
क्या है गोल्ड ETF?
गोल्ड ईटीएफ निवेश का एक साधन है जिसे शेयर बाजार में ट्रेड किया जाता है। यह सोने की कीमत को ट्रैक करता है यानी अगर बाजार में सोने की कीमत बढ़ती है तो आपके ईटीएफ का दाम भी उतना ही बढ़ेगा। निवेशक गोल्ड ईटीएफ को डीमैट अकाउंट और ट्रेडिंग अकाउंट के जरिए खरीद सकते हैं। इसे शेयरों की तरह कभी भी बाजार में खरीदा और बेचा जा सकता है।
अब निर्णय आपको करना है कि क्या आपके लिये बेहतर हो सकता है?





