क्या है आई-पैक? छापेमारी से क्यों आया राजनैतिक भूचाल?

आज सूबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा राजनीतिक रणनीतिक फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (IPAC) के कोलकाता कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के बाद एकबार फिर आई-पैक (I-PAC) अचानक चरचा में आ गई।

आई-पैक (I-PAC) पर छापेमारी की खबर मिलते ही बंगाल की राजनीति में खलबली मच गई. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे पहले आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर पहुंचीं. वहां पहले से ही कोलकाता पुलिस कमिश्नर मौजूद थे. प्रतीक जैन के घर से बाहर निकलते वक्त ममता बनर्जी के हाथ में एक ग्रीन फाइल देखी गई, जिसने सबको हैरान कर दिया. इसके बाद वह सीधे आई-पैक के साल्ट लेक स्थित दफ्तर पहुंचीं, जहां वह पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल हुईं. उनके जाने के कुछ देर बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारी कुछ फाइलें लेकर बाहर निकले और उन्हें मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखा गया.

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ये रेड सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच नहीं, बल्कि टीएमसी के उम्मीदवारों की लिस्ट और स्लोगन जैसी गोपनीय जानकारियों को चुराने की साजिश है. ये छापेमारी गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर की जा रही है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के पास करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन एजेंसियां उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करतीं, बल्कि टीएमसी की चुनावी रणनीति जानने के लिए यह ड्रामा किया जा रहा है. ममता बनर्जी ने दावा किया कि ईडी की फॉरेंसिक टीम ने आई-पैक के कंप्यूटर से डेटा ट्रांसफर किया है और उनके वित्तीय व राजनीतिक दस्तावेज ले गई है.

दूसरी ओर, विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की मौजूदगी को केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप बताया और कानूनी कार्रवाई की मांग की. ED सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान बाधा डाली गई और कुछ दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाए गए. सबूतों से छेड़छाड़ के मामले में ED ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उधर, I-PAC ने भी सर्च की वैधता को चुनौती दी है। मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस सुवरा घोष की बेंच में होगी।

वहीं, प्रतीक जैन के परिवार ने शेक्सपीयर सरानी पुलिस स्टेशन में ED अधिकारियों के खिलाफ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी का आरोप लगाते हुए शिकायत कराने का फैसला किया है।

 

आई-पैक (I-PAC) यानी Indian Political Action Committee एक पेशेवर संगठन है जो राजनीतिक दलों और नेताओं को चुनावी रणनीति, जनसंपर्क और नीति से जुड़े कामों में सहयोग करता है। आई-पैक (I-PAC) का मुख्य कार्य राजनैतिक दलों और नेताओं के लिये चुनावी रणनीति बनाना, चुनावी रणनीति के लिये डेटा एनालिसिस और ग्राउंड लेवल रिसर्च का कार्य करना, चुनाव मे नीतिगत सुझाव देना और कैंपेन मैनेजमेंट करना, जनसंपर्क और फीडबैक सिस्टम तैयार करना आदि। I-PAC राजनीतिक दलों के लिए एक प्रोफेशनल कंसल्टेंसी की तरह काम करता है, जैसे कंपनियों के लिए मैनेजमेंट कंसल्टेंट होते हैं। I-PAC ने अलग–अलग समय पर BJP, Congress, AAP, TMC, YSRCP, DMK जैसे दलों और कई मुख्यमंत्रियों/नेताओं के साथ या उनके लिये काम किया है।

IPAC जो पहले प्रशांत किशोर से जुड़ी थी, अब प्रतीक जैन के नेतृत्व में है. इसकी स्थापना सन् 2013 में वर्तमान में जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने की थी।

प्रशांत किशोर के राजनीति में सक्रिय होने के बाद, I-PAC की कमान प्रतीक जैन के हाथों में आगई। जैन आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. I-PAC ने 2019, 2021, 2024 और अन्य चुनावों में TMC की रणनीति, नारे और उम्मीदवार चयन में अहम योगदान दिया है.

 

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